कल या फिर परसों कब मनाया जाएगा भाई दूज का त्योहार? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व दीपावली के ठीक दो दिन बाद आता है और भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत करने का काम करता है.

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हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व दीपावली के ठीक दो दिन बाद आता है और भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत करने का काम करता है. रक्षाबंधन की तरह ही, भाई दूज पर भी बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद जीवन की कामना करती हैं.

इस साल भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा.

क्या होता है भाई दूज का महत्व?

भाई दूज केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि एक ऐसा दिन है जब भाई-बहन बचपन की यादों, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति अपने कर्तव्यों को ताजा करते हैं. बहनें इस दिन भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी कुशलता की प्रार्थना करती हैं, और भाई जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन दोहराते हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से जाना जाता है — जैसे कि महाराष्ट्र में भाऊ बीज, पश्चिम बंगाल में भाई फोटा, नेपाल में भाई तिहार, और उत्तर भारत में भाई दूज.

भाई दूज 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाई दूज की द्वितीया तिथि इस बार 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी.
तिलक का शुभ मुहूर्त: 23 अक्टूबर को दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा. यानी इस दिन कुल 2 घंटे 15 मिनट तक शुभ समय है जिसमें बहनें तिलक कर सकती हैं.

भाई दूज की पूजा विधि कैसे करें?

भाई दूज के दिन पूजा से पहले एक सुंदर पूजा थाली तैयार की जाती है जिसमें रोली, अक्षत (चावल), मिठाई, नारियल और दीपक रखा जाता है. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करके अपने घर के पूजन स्थान को सजाएं. इसके बाद भाई को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर लकड़ी के पटरे पर बैठाकर तिलक करें. उन्हें फूल, पान, सुपारी दें, आरती उतारें और फिर अपने हाथों से बनी मिठाई या भोजन परोसें. कहा जाता है कि इस दिन बहन द्वारा बनाया गया खाना भाई के लिए बहुत शुभ होता है.

भाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण नरकासुर का वध करके द्वारका लौटे, तब उनकी बहन सुभद्रा ने दीयों से उनका स्वागत किया था. सुभद्रा ने उन्हें तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और दीर्घायु की कामना की. तभी से यह परंपरा चलती आ रही है कि बहनें इस दिन अपने भाई को तिलक करती हैं और मंगलकामना करती हैं.

भाई दूज क्यों है विशेष?

भाई दूज का पर्व सिर्फ रीति-रिवाज नहीं, बल्कि भावनाओं का त्योहार है. यह भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला दिन होता है जो हर साल रिश्तों में मिठास भरने का मौका देता है.मान्यता है कि जो बहन विधिवत इस दिन भाई को तिलक करती है, उसकी पूजा से भाई की उम्र लंबी होती है और अकाल मृत्यु का भय दूर रहता है.

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