Whatsapp Plus Subscription: लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप अब अपने यूजर्स के लिए एक नए सब्सक्रिप्शन मॉडल की टेस्टिंग कर रहा है. मेटा के स्वामित्व वाला यह प्लेटफॉर्म “WhatsApp Plus” नाम से एक वैकल्पिक पेड सर्विस पर काम कर रहा है, जो यूजर्स को अपने ऐप एक्सपीरियंस को ज्यादा पर्सनलाइज करने का मौका देगा.
यह कदम उसी तरह का है जैसा पहले इंस्टाग्राम और स्नैपचैट अपने प्रीमियम सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए कर चुके हैं. हालांकि, शुरुआती जानकारी के आधार पर कहा जा रहा है कि इसमें मिलने वाले फीचर्स ज्यादा एडवांस या जरूरी नहीं हैं.
WhatsApp Plus: क्या है नया सब्सक्रिप्शन मॉडल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “WhatsApp Plus” एक ऑप्शनल सब्सक्रिप्शन होगा, यानी यूजर्स चाहें तो इसे ले सकते हैं और चाहें तो मुफ्त वर्जन का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं.
यह खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो अपने चैटिंग अनुभव को ज्यादा कस्टमाइज करना चाहते हैं. कंपनी फिलहाल इसे सीमित यूजर्स के बीच टेस्ट कर रही है ताकि फीडबैक लेकर इसे बेहतर बनाया जा सके.
इस नई सर्विस को कुछ यूजर्स ने स्पॉट किया है, जिनमें सोशल मीडिया कंसल्टेंट मैट नवारा भी शामिल हैं.
सब्सक्रिप्शन में क्या मिलेंगी सुविधाएं?
WhatsApp Plus के तहत मिलने वाले फीचर्स मुख्य रूप से कस्टमाइजेशन से जुड़े हुए हैं.
इसमें यूजर्स को—
हालांकि, इन फीचर्स में ऐसा कुछ भी नहीं है जो ऐप के मूल उपयोग या कार्यक्षमता को पूरी तरह बदल दे.
कितनी हो सकती है कीमत?
फिलहाल कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कीमत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार यूरोप में इसकी कीमत लगभग 2.49 यूरो (करीब 273 रुपये) प्रति माह हो सकती है.
वहीं पाकिस्तान में इसकी कीमत करीब 229 पाकिस्तानी रुपये बताई जा रही है. इसके अलावा, यूजर्स को एक महीने का फ्री ट्रायल भी दिया जा सकता है, ताकि वे पहले इसे आजमा सकें.
क्या यह सब्सक्रिप्शन वाकई उपयोगी है?
अगर फीचर्स पर नजर डालें तो यह साफ है कि WhatsApp Plus ज्यादा “फंक्शनल” नहीं बल्कि “पर्सनलाइजेशन” पर केंद्रित है.
इसमें न तो कोई खास सिक्योरिटी फीचर जोड़ा गया है और न ही प्राइवेसी से जुड़ा कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. यहां तक कि स्टेटस में आने वाले विज्ञापनों को हटाने जैसी सुविधा का भी इसमें जिक्र नहीं है.
ऐसे में यह सब्सक्रिप्शन आम यूजर्स के लिए जरूरी नहीं लगता, बल्कि सिर्फ उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अपने ऐप को अलग और खास बनाना चाहते हैं.
पहले भी ले चुका है सब्सक्रिप्शन फीस
दिलचस्प बात यह है कि व्हाट्सऐप पहले भी कुछ देशों में सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुका है. शुरुआती दौर में ऐप इस्तेमाल करने के लिए सालाना लगभग 1 डॉलर की फीस ली जाती थी.
हालांकि, जब कंपनी को फेसबुक (अब मेटा) ने खरीदा, तो 2016 में इस फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया गया और ऐप को फ्री कर दिया गया.
भारत में कितना सफल होगा WhatsApp Plus?
भारत जैसे बड़े और संवेदनशील बाजार में इस तरह के सब्सक्रिप्शन मॉडल की सफलता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
यहां के यूजर्स आमतौर पर तभी पैसे खर्च करते हैं जब उन्हें कोई ठोस फायदा या जरूरी सुविधा मिले. लेकिन WhatsApp Plus में फिलहाल जो फीचर्स दिए जा रहे हैं, वे ज्यादा उपयोगी या जरूरी नहीं माने जा रहे.
चैट थीम, पिन चैट की संख्या बढ़ाना या रिंगटोन बदलना- ये ऐसी सुविधाएं हैं जिन्हें अधिकांश भारतीय यूजर्स प्राथमिकता नहीं देते, खासकर तब जब बेसिक ऐप पहले से ही मुफ्त और पर्याप्त है.
ये भी पढ़ें- 'कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें कभी नहीं...', पहलगाम अटैक की बरसी से पहले भारतीय सेना की खुली चेतावनी