पुतिन के भारत दौरे से देश को क्या मिलेगा? काम आएगी दशकों की दोस्ती, हो सकते हैं ये बड़े फैसले

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत के दो दिवसीय राजकीय दौरे पर दिल्ली पहुंचेंगे.

    What will the country get from Putins visit to India
    प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत के दो दिवसीय राजकीय दौरे पर दिल्ली पहुंचेंगे. इस दौरे के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत-रूस के पुराने संबंधों को और नई दिशा देने के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट्स और रणनीतिक सहयोगों में तेजी ला सकती है.

    ऑपरेशन सिंदूर में रूस की तकनीक

    हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा क्षमता और रूस से प्राप्त तकनीक की भूमिका को स्पष्ट रूप से साबित किया. इस ऑपरेशन में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का समन्वित उपयोग किया गया. इन सभी प्रणालियों की वजह से भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पर निर्णायक बढ़त हासिल की.

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस सफलता के बाद भारत अब S-400 वायु रक्षा प्रणाली के अतिरिक्त बैच खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे का सामना और भी प्रभावी तरीके से किया जा सके.

    सत्तर वर्षों की रणनीतिक साझेदारी

    डॉ. वी.के. सारस्वत, जो नीति आयोग के सदस्य और रक्षा विशेषज्ञ हैं, बताते हैं कि भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी 1970 के दशक से लगातार विकसित होती रही है. इस अवधि में रूस ने भारत को सैम-2, मिग-21, मिग-27, मिग-29 लड़ाकू विमानों और टी-90 टैंकों सहित कई अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य प्रणालियों की आपूर्ति की.

    बीते दो दशकों में यह संबंध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहा. भारत और रूस ने साझा तकनीकी विकास और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया. ब्रह्मोस मिसाइल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया.

    ब्रह्मोस: सटीक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल अपनी उच्च गति, लंबी दूरी और सटीक निशाने की क्षमता के कारण दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुकी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल ने दुश्मन के ठिकानों को उच्च सटीकता के साथ निशाना बनाया. डॉ. सारस्वत के अनुसार, ब्रह्मोस का अगला संस्करण हाइपरसोनिक तकनीक से लैस होगा, जो भविष्य में लड़ाकू अभियानों का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है.

    S-400: भारत के आकाश की ढाल

    S-400 वायु रक्षा प्रणाली भारत की हवाई सीमा को लगभग अभेद्य बना चुकी है. यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का पता लगाकर उन्हें हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही निष्क्रिय कर देती है. ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की मौजूदगी ने भारत को हवाई क्षेत्र में निर्णायक बढ़त दिलाई और किसी भी संभावित हवाई हमले को नाकाम किया.

    सुखोई-30MKI: भारतीय तकनीक और रूसी प्लेटफॉर्म

    भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इन विमानों की आधुनिक एवियोनिक्स, हथियार प्रणाली और लंबी उड़ान क्षमता ने भारत को आक्रामक अभियानों में मजबूती दी. भविष्य में सुखोई विमानों के और उन्नत संस्करण भारत की वायु सेना को और अधिक रणनीतिक ताकत देंगे.

    रक्षा के बाहर भी मजबूत सहयोग

    भारत और रूस के बीच सहयोग केवल हथियारों तक ही सीमित नहीं है. दोनों देश मिलकर कई क्षेत्रों में साझेदारी कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • कुडनकुलम परमाणु परियोजना और ऊर्जा क्षेत्र
    • उपग्रह प्रक्षेपण और स्पेस टेक्नोलॉजी
    • पनडुब्बी और समुद्री सुरक्षा तकनीक
    • संयुक्त रक्षा उद्योग और उत्पादन

    यह सहयोग भारत की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता को और मजबूत करता है.

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