Trump C5 1 Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक कूटनीति की सुर्खियों में हैं. गुरुवार को वे वाशिंगटन डीसी में पांच मध्य एशियाई देशों, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के नेताओं की मेजबानी करेंगे.
यह बैठक केवल एक औपचारिक शिखर सम्मेलन नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए चीन और रूस के प्रभाव क्षेत्र में रणनीतिक सेंध लगाने की कोशिश मानी जा रही है.इस समूह को “C5 1” के नाम से जाना जाता है, जहां “C5” इन पांच मध्य एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करता है और “ 1” अमेरिका को.
ट्रंप प्रशासन इस मंच के जरिए नई व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारियां स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि एशिया में अमेरिकी प्रभाव को दोबारा मजबूती दी जा सके.
C5 1 क्या है और क्यों है अहम?
C5 1 की शुरुआत वर्ष 2015 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई थी. इसका उद्देश्य था, व्यापार, ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट और संचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना. 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इन देशों के नेताओं से मुलाकात की थी, जब रूस-यूक्रेन युद्ध ने भू-राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे.
उस बैठक में साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, उग्रवाद, अवैध प्रवास और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति बनी थी. अब ट्रंप इस साझेदारी को आर्थिक और सामरिक स्तर पर और आगे बढ़ाना चाहते हैं.
ट्रंप की निगाहें मध्य एशिया पर क्यों?
मध्य एशिया न सिर्फ भूगोल के लिहाज से रणनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह रेअर अर्थ मिनरल्स यानी दुर्लभ धातुओं का खजाना भी है. ये वही धातुएं हैं जिनकी मदद से स्मार्टफोन, मिसाइल सिस्टम, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और इलेक्ट्रिक वाहनों के पुर्जे बनते हैं, और फिलहाल इस क्षेत्र में चीन का दबदबा है.
अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ट्रंप प्रशासन ने 12.4 अरब डॉलर के व्यापार समझौते इन देशों के साथ किए हैं, जिनमें खनिज, रक्षा और विमानन क्षेत्र शामिल हैं. अप्रैल 2025 में कजाकिस्तान ने सेरियम, लैंथेनम, नियोडिमियम और यिट्रियम जैसे खनिजों के 2 करोड़ टन से अधिक के भंडार खोजे, जो वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को चुनौती दे सकते हैं.
चीन और रूस की बढ़ी चिंता
ट्रंप की इस बैठक से बीजिंग और मॉस्को दोनों में हलचल बढ़ गई है. अगर अमेरिका इन देशों से खनिज संसाधनों की लंबी अवधि की डील कर लेता है, तो चीन की सप्लाई चेन पर पकड़ कमजोर हो सकती है. वहीं, रूस के लिए यह भू-राजनीतिक खतरा है, क्योंकि ये वही देश हैं जो कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे और आज भी पुतिन के साथ घनिष्ठ संबंध रखते हैं.
ट्रंप अब उन्हीं देशों को अपने पाले में करके मॉस्को को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. रूस ने 2022 में C5 1 देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने के लिए समझौते किए थे, लेकिन अमेरिका की नई सक्रियता से वह रणनीति अब कमजोर पड़ सकती है.
अमेरिका की ‘नई ग्रेट गेम’
यह शिखर सम्मेलन दरअसल 21वीं सदी की नई ‘ग्रेट गेम’ का हिस्सा है, जहां अमेरिका, चीन और रूस मध्य एशिया की ऊर्जा और खनिज संपदा को लेकर प्रतिस्पर्धा में हैं. ट्रंप के इस कदम से यह साफ है कि अमेरिका सीमित सैन्य उपस्थिति के बजाय आर्थिक प्रभाव के जरिए अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है.
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