UP Voter List Verification: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को पूरी तरह से दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू हो गया है. 28 अक्टूबर 2025 से राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम औपचारिक रूप से आरंभ हुआ. चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहा यह अभ्यास पूरे देश के 12 राज्यों में हो रहा है, लेकिन सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ यूपी बटोर रहा है क्योंकि यह प्रक्रिया 22 साल बाद हो रही है. आखिरी बार ऐसा पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, इस अभियान का मकसद है कि कोई भी योग्य मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रहे. प्रदेश में फिलहाल करीब 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज हैं और 1,62,486 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. यह संख्या देश की कुल आबादी का लगभग 7 फीसदी है, जिससे उत्तर प्रदेश देश के चुनावी नक्शे पर सबसे निर्णायक राज्य बन जाता है. हालांकि, SIR प्रक्रिया के तहत करीब 1.30 करोड़ नामों के कटने की संभावना जताई जा रही है, जिसने राजनीतिक हलचल को और तेज़ कर दिया है.
कैसे चलेगा अभियान?
SIR अभियान कई चरणों में पूरा किया जाएगा. 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक तैयारी, प्रशिक्षण और फॉर्म छपाई का काम चलेगा. इसके बाद 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करेंगे और नागरिकों से भरवाएँगे. 9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी. इसके बाद 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक लोग अपने नाम जोड़ने, हटाने या सुधार की शिकायत दर्ज करा सकेंगे. शिकायतों की जांच 31 जनवरी 2026 तक पूरी होगी और 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.
बूथों का पुनर्गठन और नए मतदाताओं पर फोकस
नई व्यवस्था के तहत किसी भी पोलिंग बूथ पर 1200 से ज़्यादा मतदाता नहीं होंगे. इसके लिए मौजूदा बूथों की समीक्षा की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर नए बूथ बनाए जाएंगे. इस कदम से भीड़ और गड़बड़ी की शिकायतें कम करने में मदद मिलेगी. इस बार आयोग का विशेष ज़ोर 18-19 साल के नए वोटर्स और महिलाओं के नाम जोड़ने पर रहेगा. राज्य में लगभग 2 करोड़ युवा मतदाता हैं, जिनमें से बड़ी संख्या पहली बार वोट डालने जा रही है.
लोग अपने नाम की स्थिति Voter Helpline ऐप, voterportal.eci.gov.in या 1950 हेल्पलाइन नंबर पर चेक कर सकते हैं. ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा भी उपलब्ध है. इसके लिए पूरे प्रदेश में जिला, रजिस्ट्रेशन और सहायक अधिकारियों के साथ 1.62 लाख से अधिक बीएलओ की टीम को प्रशिक्षित किया गया है.
क्यों जरूरी है यह ‘वोटर लिस्ट शुद्धिकरण’
चुनाव आयोग इस पूरे अभियान को “वोटर लिस्ट शुद्धिकरण” कह रहा है. इस प्रक्रिया के तहत मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाएंगे, डुप्लिकेट एंट्री खत्म की जाएगी और ऐसे लोग जिनका नाम कई जगह दर्ज है, उनकी सूचियाँ एक की जाएँगी. साथ ही नए मतदाता — जैसे शादी या नौकरी के कारण स्थान बदले हुए नागरिक आसानी से अपने नाम जुड़वा सकेंगे. इस तरह SIR न केवल मतदाता सूची को सटीक बनाएगा, बल्कि चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा. आयोग का मानना है कि हर नागरिक का नाम सही जगह दर्ज होना ही लोकतंत्र की सच्ची नींव है.
सियासी पारा चढ़ा, विपक्ष का आरोप
हालांकि, इस अभियान ने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है. समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार SIR की आड़ में विपक्षी वोट बैंक के नाम हटाने की कोशिश कर रही है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर तुरंत मोर्चा संभालते हुए हर विधानसभा क्षेत्र में ‘SIR PDA प्रहरी’ तैनात करने का एलान किया है. ये प्रहरी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के वास्तविक वोटरों की निगरानी करेंगे ताकि उनके नाम सूची से न हटें. अखिलेश ने कहा कि यह लड़ाई केवल वोट की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की है.
आयोग की अपील
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. उन्होंने जनता से अपील की कि जब बीएलओ घर आएं, तो वे अपने दस्तावेज़ — आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र और आवश्यक प्रमाण तैयार रखें और सही-सही जानकारी दें.
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