भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए मुकाबले में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो क्रिकेट में अक्सर नहीं दिखाई देता. मैच के दौरान भारतीय टीम को बल्लेबाजों की एक तकनीकी गलती का खामियाजा भुगतना पड़ा और स्कोरबोर्ड से कुल 10 रन काट लिए गए. खास बात यह रही कि यह सजा भारतीय ऑलराउंडर विप्रज निगम की वजह से दो बार मिली. हालांकि इसके बावजूद विप्रज ने बल्ले से शानदार योगदान देकर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई.
पिच पर दौड़ना पड़ा महंगा
क्रिकेट के नियमों के अनुसार बल्लेबाजों को पिच के संरक्षित हिस्से का विशेष ध्यान रखना होता है. यदि कोई खिलाड़ी बार-बार पिच के बीच वाले हिस्से पर दौड़ता है और उसे नुकसान पहुंचाने की आशंका पैदा करता है, तो अंपायर चेतावनी देने के बाद पेनल्टी रन लगा सकते हैं.
भारतीय टीम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. दरअसल, 33वें ओवर के दौरान अनुकूल रॉय को पिच के बीच वाले हिस्से पर दौड़ने के लिए अंपायरों ने चेतावनी दी थी. भले ही अनुकूल उसके बाद आउट होकर पवेलियन लौट गए, लेकिन चेतावनी पूरी टीम पर लागू रही और बाद में आने वाले बल्लेबाजों को भी उसका पालन करना था.
विप्रज निगम को दो बार मिली सजा
नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे विप्रज निगम से दो बार वही गलती हो गई. 35वें ओवर में उन्हें पिच के संरक्षित हिस्से पर दौड़ते हुए देखा गया. अंपायरों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारतीय टीम पर 5 रन की पेनल्टी लगा दी. इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी. केवल दो ओवर बाद विप्रज फिर से उसी क्षेत्र में दौड़ते पाए गए. नतीजा यह हुआ कि अंपायरों ने दूसरी बार भी 5 रन की पेनल्टी लगा दी. इस तरह भारतीय टीम के खाते से कुल 10 रन कम कर दिए गए.
क्यों काटे जाते हैं पेनल्टी रन?
क्रिकेट में पिच का बीच वाला हिस्सा गेंदबाजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. गेंद अधिकतर इसी क्षेत्र में टप्पा खाती है और मैच के दौरान पिच की गुणवत्ता गेंदबाजी पर सीधा असर डालती है. यदि बल्लेबाज बार-बार इस हिस्से पर दौड़कर उसे नुकसान पहुंचाते हैं, तो इससे गेंदबाजों को नुकसान हो सकता है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के नियमों में ऐसे मामलों के लिए सख्त प्रावधान बनाए गए हैं. चेतावनी के बाद गलती दोहराने पर बल्लेबाजी टीम को पेनल्टी रन गंवाने पड़ते हैं.
मुश्किल में फंसी थी भारत ए की पारी
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी जरूर रही, लेकिन बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे. युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी, कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और तिलक वर्मा को अच्छी शुरुआत मिली, मगर कोई भी खिलाड़ी उसे बड़े स्कोर में नहीं बदल सका. स्थिति तब और खराब हो गई जब 143 रन के स्कोर तक भारत ए के सात विकेट गिर चुके थे. ऐसा लग रहा था कि टीम 200 रन तक पहुंचने के लिए भी संघर्ष करेगी.
विप्रज और सूर्यांश बने संकटमोचक
एक तरफ विकेट लगातार गिर रहे थे, वहीं दूसरी ओर विप्रज निगम और सूर्यांश शेडगे ने जिम्मेदारी संभाली. दोनों बल्लेबाजों ने दबाव की स्थिति में शानदार संयम दिखाया और आठवें विकेट के लिए 104 रनों की अहम साझेदारी की. विप्रज निगम ने 49 गेंदों में 51 रन बनाकर टीम को मजबूती दी, जबकि सूर्यांश शेडगे ने भी शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया. दोनों की इस साझेदारी ने भारत ए को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई.
265 रन तक पहुंची भारतीय टीम
निचले क्रम की इस बेहतरीन साझेदारी की बदौलत भारत ए की टीम 265 रन के प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचने में सफल रही. हालांकि मैच के दौरान मिले 10 रन की पेनल्टी चर्चा का विषय बनी रही, लेकिन विप्रज निगम ने अपनी उपयोगी अर्धशतकीय पारी से उस गलती की काफी हद तक भरपाई भी कर दी.
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