हत्या, किडनैपिंग, अंधाधुंध फायरिंग... PoK में पाकिस्तान सेना का नरसंहार! हिंसा में 11 मौतें, देखें Video

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं.

violence ahead of protest against Pakistan government Army in PoK jaac Video
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में अब तक 11 लोगों की मौत होने और 70 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलाकोट शहर में स्थिति उस समय बिगड़ गई जब जेएएसी समर्थक एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्र हुए. वहां संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था, जिसकी कथित तौर पर पहले हुई गोलीबारी की घटना में मौत हुई थी. इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया और हालात हिंसक हो गए.

संगठन पर प्रतिबंध के बाद बढ़ा विवाद

पिछले सप्ताह पीओके प्रशासन ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था. इसके बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जिससे विरोध और तेज हो गया.

हिंसा के दौरान चार पुलिसकर्मियों और एक आम नागरिक की मौत की सूचना है. वहीं सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारियों की जान गई. कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है. हालांकि स्थानीय लोगों और संगठन के समर्थकों का दावा है कि वास्तविक मृतकों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है.

आरक्षित सीटों को लेकर नाराजगी

प्रदर्शनों के पीछे प्रमुख कारण पीओके विधानसभा में आरक्षित सीटों का मुद्दा बताया जा रहा है. 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं.

जेएएसी का आरोप है कि इस व्यवस्था से स्थानीय आबादी का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा. संगठन लंबे समय से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहा है.

महंगाई और बेरोजगारी भी बड़े मुद्दे

आरक्षित सीटों के अलावा संगठन क्षेत्र में बढ़ती महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, प्रशासनिक समस्याओं और राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी उठाता रहा है. पिछले दो वर्षों में आटा और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ कई बड़े आंदोलन आयोजित किए गए थे.

बंद का आह्वान

जेएएसी ने 9 जून को पूरे पीओके में बंद बुलाया है. यह बंद आरक्षित सीटों के विरोध के साथ-साथ संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों और उसके एक नेता की मौत के विरोध में आयोजित किया गया.

मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने हालिया हिंसा पर चिंता व्यक्त की है. आयोग का कहना है कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए और उनकी शिकायतों का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए.

आयोग ने घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष टीम भेजने की भी घोषणा की है.

चुनाव से पहले सुरक्षा बढ़ी

जेएएसी नेताओं ने साफ किया है कि प्रतिबंध के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा. संगठन के नेता शौकत नवाज मीर ने आरोप लगाया कि रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया.

उधर 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनावों को देखते हुए पूरे पीओके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर असर पड़ा है, बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है और जेएएसी के मुख्य कार्यालय को भी सील कर दिया गया है.

क्षेत्र में हालात को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं, जबकि राजनीतिक माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है.

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