मशहूर फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन, घर में पड़ा मिला शव; बदबू आने पर पड़ोसियों ने की थी शिकायत

MM Baig Passes Away: दिग्गज फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन हो गया है. वह 70 वर्ष के थे और इस हफ्ते की शुरुआत में अपने घर में मृत पाए गए. उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है.

Veteran filmmaker MM Baig Passes Away Dead body found in the house
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MM Baig Passes Away: दिग्गज फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन हो गया है. वह 70 वर्ष के थे और इस हफ्ते की शुरुआत में अपने घर में मृत पाए गए. उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके पब्लिसिस्ट हनी जवेरी ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की और बताया कि बेग साहब काफी समय से अस्वस्थ थे.

पुलिस ने खोला दरवाजा

हनी जवेरी के अनुसार, एम एम बेग कुछ दिन से घर से बाहर नहीं निकले थे, और इस दौरान उनके पड़ोसियों ने घर से आ रही दुर्गंध की शिकायत पुलिस से की. पुलिस ने दरवाजा खोला और अंदर बेग साहब का शव मिला. पुलिस ने उनकी बेटी को सूचना दी और शव को कूपर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा. जवेरी ने उन्हें याद करते हुए कहा, "वो बहुत अच्छे व्यक्ति थे, और मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं."

फिल्म इंडस्ट्री में योगदान

एम एम बेग का करियर लंबे समय तक बॉलीवुड के साथ जुड़ा रहा. उन्होंने जे ओम प्रकाश, विमल कुमार और राकेश रोशन के सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया. वह गोविंदा की फिल्मों ‘आदमी खिलौना है’, ‘जैसी करनी वैसी भरनी’, ‘कर्ज चुकाना है’ और अनिल कपूर की ‘काला बाजार’ और ‘किशन कन्हैया’ जैसी फिल्मों से जुड़े रहे.

निर्देशन की दुनिया में कदम

निर्देशक के रूप में एम एम बेग ने नसीरुद्दीन शाह अभिनीत ‘मासूम गवाह’ (1990) और शिल्पा शिरोडकर अभिनीत ‘छोटी बहू’ (1994) जैसी फिल्में निर्देशित कीं, जिनमें दोनों ही फिल्मों ने अपने समय में दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.

ऋतिक रोशन के रहे थे गुरु 

बेग साहब के राकेश रोशन से बहुत अच्छे संबंध थे, और उन्होंने ऋतिक रोशन को उनकी डायलॉग डिलीवरी और उच्चारण में मदद की थी. जवेरी के अनुसार, यह बात ऋतिक की पहली फिल्म "कहो ना प्यार है" से काफी पहले की है. बेग साहब ने ऋतिक को डायलॉग बोलने का अभ्यास कराया, जो बाद में उनकी सफलता की कुंजी बनी.

बेग साहब की बेटी शाहिंदा बेग

बेग साहब की बेटी शाहिंदा बेग, जिन्हें बेबी गुड्डू के नाम से भी जाना जाता था, 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध बाल कलाकार थीं. उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘आखिर क्यों?’, ‘नगीना’, ‘प्यार किया है प्यार करेंगे’ और ‘औलाद’ जैसी हिट फिल्में शामिल हैं. उनकी बाल कलाकार के रूप में अहम भूमिका को आज भी याद किया जाता है.

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