धक्का-मुक्की और टूट गई रेलिंग, आखिर कैसे वेंकेटेश्वर मंदिर में मची भगदड़? PM मोदी ने जताया दुख

Venkateshwar Stampede: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले में शनिवार को आस्था का एक बड़ा उत्सव मातम में बदल गया. काशीबुग्गा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एकादशी के पावन अवसर पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिसमें 10 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई.

Venkateshwar Temple Stampede How Happened 10 People Died Many Injured
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Venkateshwar Stampede: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले में शनिवार को आस्था का एक बड़ा उत्सव मातम में बदल गया. काशीबुग्गा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एकादशी के पावन अवसर पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिसमें 10 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं. घायलों में कई महिलाओं और बुजुर्गों की हालत गंभीर है. प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है, वहीं मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था. कार्तिक एकादशी के पावन अवसर पर हजारों लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे थे. जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर और प्रवेश द्वार पर भीड़ बढ़ती चली गई. अचानक एक समय ऐसा आया जब लाइन में लगे श्रद्धालु आगे बढ़ने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे, जिससे अफरातफरी मच गई. लोगों के गिरने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई.

रेलिंग टूटने से हुआ बड़ा हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंदिर की सीढ़ियों के पास लगी रेलिंग पर भारी दबाव के कारण वह अचानक टूट गई. भीड़ का संतुलन बिगड़ते ही कई श्रद्धालु नीचे गिर पड़े और उनके ऊपर लोग चढ़ते चले गए. इस दौरान कई महिलाएं और बुजुर्ग कुचल गए. मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई. प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं. घायलों को नज़दीकी सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीमें इलाज में जुटी हैं.

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जांच के आदेश

राज्य के कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू हादसे की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने मंदिर प्रशासन से हादसे के कारणों की जानकारी ली और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो. जिला प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भीड़ नियंत्रण में कहां और किस स्तर पर चूक हुई.

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जताया शोक

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ट्वीट करते हुए कहा, कि श्रीकाकुलम ज़िले के काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में हुई भगदड़ की खबर से अत्यंत दुखी हूं. इस हृदयविदारक घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु गहरा सदमा देने वाली है. मैंने अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं. सीएम ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और जनप्रतिनिधियों से भी घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्यों की स्थिति का निरीक्षण करने को कहा है.

नारा लोकेश ने भी व्यक्त की संवेदना

आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने इस दर्दनाक घटना पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा, कि काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई, यह बेहद दुखद है. इस पवित्र एकादशी के दिन ऐसा हादसा होना हम सबके लिए पीड़ादायक है. सरकार घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही है. उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें घटना की सूचना मिली, उन्होंने अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से संपर्क किया और प्रभावित परिवारों को तुरंत सहायता देने के निर्देश दिए.

श्रद्धा के पर्व में मातम

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर में सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे. वर्षों से इस एकादशी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इस बार भीड़ अनुमान से कहीं अधिक रही. सुरक्षा घेरे के अभाव और भीड़ प्रबंधन की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया. मौके पर अब भी प्रशासन की टीमें डटी हैं और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने की घोषणा जल्द की जा सकती है.

आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत

यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत में धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सुधारों की आवश्यकता है. हर साल ऐसे कई हादसे केवल लापरवाही और अपर्याप्त तैयारी के कारण होते हैं. काशीबुग्गा का यह हादसा न सिर्फ प्रशासन के लिए सबक है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को भी चेतावनी देता है कि आस्था के साथ-साथ संयम और सावधानी भी जरूरी है.

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