वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है. 3 जनवरी 2026 को हुई इस कार्रवाई ने सिर्फ लैटिन अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया तक सियासी बहस छेड़ दी है. कोई इसे सुरक्षा के नाम पर उठाया गया कदम बता रहा है, तो कोई इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है. इसी बीच इटली, रूस और चीन जैसे देशों के बयान सामने आए हैं, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग नजरिए से देखा है.
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर एक संतुलित लेकिन स्पष्ट बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सत्ता परिवर्तन के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों के खिलाफ सीमित और रक्षात्मक कदमों को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता. मेलोनी के मुताबिक, ऐसे हालात में जहां किसी सरकार पर ड्रग तस्करी और संगठित अपराध को संरक्षण देने के आरोप हों, वहां सुरक्षा के नाम पर हस्तक्षेप को पूरी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल समाधान नहीं हो सकता.
ट्रंप का बड़ा दावा: अमेरिका करेगा वेनेजुएला का प्रबंधन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में और भी आक्रामक रुख अपनाया है. ट्रंप ने कहा है कि जब तक वेनेजुएला में हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका वहां की व्यवस्था को संभालेगा. उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए एक विशेष टीम गठित की गई है.इस टीम में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई शीर्ष अधिकारी शामिल हैं. ट्रंप का दावा है कि यह कदम वेनेजुएला को “स्थिरता और सुरक्षा” की ओर ले जाने के लिए उठाया गया है, ताकि वहां की जनता को संकट से बाहर निकाला जा सके.
रूस की तीखी प्रतिक्रिया, रिहाई की मांग
अमेरिकी कार्रवाई के बाद रूस ने सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे वेनेजुएला के खिलाफ “सशस्त्र आक्रमण” करार देते हुए बेहद गंभीर और निंदनीय बताया है. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उनका कोई ठोस आधार नहीं है.मॉस्को ने अमेरिका से मांग की है कि वह वेनेजुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे. साथ ही रूस ने जोर देकर कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है.
चीन ने बताया संप्रभुता पर हमला
चीन ने भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया. चीन का कहना है कि यह कदम वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है और इससे पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है.बीजिंग ने अमेरिका पर “दादागिरी” और “हेजेमोनिक बिहेवियर” का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी भी देश को बल प्रयोग के जरिए अपने हित थोपने का अधिकार नहीं है. चीन ने अमेरिका से अपील की है कि वह तुरंत सैन्य कार्रवाई रोके और कूटनीतिक रास्ते से समाधान की ओर बढ़े.
वैश्विक राजनीति के लिए बड़ा इम्तिहान
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप अब सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है. जहां कुछ देश इसे सुरक्षा से जुड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं कई ताकतें इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बता रही हैं. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह संकट संवाद की मेज पर सुलझता है या दुनिया एक और बड़े भू-राजनीतिक टकराव की ओर बढ़ती है.
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