उत्तराखंड ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, केंद्र सरकार ने दिया 100 करोड़ का पुरस्कार, जानें पूरी जानकारी

खनन क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने फिर से अपनी बढ़ती ताकत का सबूत दिया है. भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा जारी राज्य खनन तत्परता सूचकांक (SMRI) में यह प्रदेश देशभर में दूसरे नंबर पर आ गया है. इस शानदार उपलब्धि के चलते केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड को ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया है.

Uttarakhand ranks second in State Mining Readiness Index awarded ₹100 crore for mining reforms
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देहरादून: खनन क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने फिर से अपनी बढ़ती ताकत का सबूत दिया है. भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा जारी राज्य खनन तत्परता सूचकांक (SMRI) में यह प्रदेश देशभर में दूसरे नंबर पर आ गया है. इस शानदार उपलब्धि के चलते केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड को ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया है. यह राशि वित्त मंत्रालय की पूंजीगत व्यय सहायता योजना (SASIC) के तहत दी गई है, जो इस क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी.

SMRI रैंकिंग में उत्तराखण्ड का दबदबा

खनन सुधारों के क्षेत्र में राज्यों की तत्परता और पारदर्शिता को मापने वाली SMRI रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने ‘C’ श्रेणी (सीमित खनिज संसाधन वाले राज्य) में दूसरा स्थान हासिल किया है. यह रैंकिंग राज्यों के खनन लॉट की ई-नीलामी, खनन पट्टों की स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति, खनिज परिवहन निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी मानकों पर आधारित होती है. इन सभी मानकों पर उत्तराखण्ड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और खनन क्षेत्र में अपनी तत्परता का देश को भरोसा दिलाया.

आधुनिक तकनीक से सुसज्जित खनन विभाग

उत्तराखण्ड के खनन विभाग ने डिजिटल युग के अनुरूप कई तकनीकी प्रणालियां लागू की हैं. माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम (MDTSS) के तहत प्रदेश में 40 स्थानों पर 45 बूम बैरियर लगाए गए हैं. इसके अलावा, Mineral Management System, e-Ravana, Mining e-Services, मोबाइल इंस्पेक्शन ऐप, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS), VTS Integration और Weighbridge Management System जैसी तकनीकों ने खनन कार्य को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है. अवैध खनन पर कड़ी नज़र रखने के लिए नाइट विजन ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. इन उपायों से न केवल खनन प्रक्रिया में सुधार हुआ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कालेधन पर भी लगाम लगी है.

विशेषज्ञों और अधिकारियों के विचार

खनन विभाग के विशेष सचिव बृजेश कुमार संत ने इस सफलता को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू पारदर्शी और सतत खनन नीति की सफलता बताया. उन्होंने कहा कि यह तकनीकी उन्नति और कड़ी निगरानी खनन क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है.

उत्तराखण्ड मॉडल: दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा

उत्तराखण्ड का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन चुका है. देश के कई राज्य इस प्रणाली को अपनाने के लिए तैयार हैं, ताकि वे भी अपनी खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें. सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तराखण्ड ने अपनी नीति, तकनीक और प्रशासनिक सुधारों से देश में अग्रणी स्थान हासिल कर दिखाया है.

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