उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से बुधवार, 5 नवंबर को एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई. चुनार रेलवे स्टेशन पर हुए एक भीषण हादसे में कई लोगों की जान चली गई. कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए आए श्रद्धालु ट्रेन की पटरी पार कर रहे थे, तभी कालका-हावड़ा एक्सप्रेस के आ जाने से ये भयावह हादसा हो गया. मौके पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते पूरा स्टेशन अफरा-तफरी में बदल गया.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बुधवार सुबह चुनार स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी. कई लोग ट्रेन से उतरकर पटरी पार कर रहे थे ताकि वे गंगा स्नान के लिए आगे जा सकें. इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही कालका-हावड़ा एक्सप्रेस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. बताया जा रहा है कि करीब छह लोग मौके पर ही कटकर मौत के शिकार हो गए. हादसा इतना भीषण था कि शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया.
गलत दिशा में उतरने से हुआ हादसा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना “गलत दिशा से ट्रेन से उतरने” के कारण हुई. चोपन-चुनार पैसेंजर ट्रेन से कई यात्री चुनार स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने प्लेटफॉर्म की बजाय ट्रेन के दूसरे दरवाजे से उतरने की कोशिश की. उसी समय विपरीत दिशा से कालका-हावड़ा एक्सप्रेस आ गई और हादसा हो गया. रेलवे ने इसे MRO (Man Run Over) मामला बताया है.
मुख्यमंत्री योगी ने जताया शोक, दिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को मौके पर पहुंचने के आदेश दिए हैं. साथ ही, घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है.
स्टेशन पर मचा हाहाकार, राहत-बचाव जारी
हादसे के बाद चुनार रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कई यात्रियों ने इस भयावह घटना को अपनी आंखों से देखा, जिनमें से कई खुद सदमे में हैं. पुलिस, प्रशासन और रेलवे के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं. बचाव कार्य जारी है और मृतकों की पहचान की कोशिश की जा रही है.
बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा
रेलवे ने अब तक चार लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मृतकों की संख्या इससे अधिक हो सकती है. कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.हादसे में मारे गए अधिकांश लोग कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र स्नान के लिए मिर्जापुर आए थे. यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन इस हादसे ने पर्व की खुशियों को मातम में बदल दिया.
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