US-Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन मंगलवार को बाजार खुलते ही इसमें तेज गिरावट देखी गई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई और तेल की कीमतों में गिरावट आई.
ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है. उनके इस बयान से वैश्विक तेल आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होने की आशंका कम हुई, जिसका असर सीधे कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा.
ब्रेंट और WTI क्रूड में तेज गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 10.55 डॉलर (लगभग 10.66%) गिरकर 88.41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं WTI क्रूड भी करीब 9.95 डॉलर (लगभग 10.50%) गिरकर 84.82 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा.
इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो साल 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था.
सप्लाई रुकने की आशंका से बढ़ी थी कीमत
सऊदी अरब सहित कई देशों की ओर से उत्पादन कम करने की आशंका के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई थी. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था.
पुतिन और ट्रंप की बातचीत के बाद नरमी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और ट्रंप के बीच बातचीत के बाद बाजार में थोड़ी राहत दिखी. बताया गया कि पुतिन ने ईरान से जुड़े युद्ध को रोकने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं.
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अंतिम चरण में हो सकता है और यह उम्मीद से पहले खत्म हो सकता है. उन्होंने पहले कहा था कि यह युद्ध चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव
हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो ईरान इस क्षेत्र से तेल का निर्यात रोक सकता है.
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर भी असर डाला है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है.
उत्पादन में कटौती भी चिंता का कारण
ओपेक देशों में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक इराक रोजाना करीब 13 लाख बैरल तेल उत्पादन कम कर चुका है. इराक का कहना है कि उसके पास पर्याप्त स्टोरेज क्षमता नहीं है.
इसके अलावा कुवैत ने भी तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है.
वहीं G-7 देशों ने कहा है कि वे कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं, हालांकि उन्होंने फिलहाल आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का कोई वादा नहीं किया है.
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