UPSC में फेल कैंडिडेट बन गया ड्रग तस्करी का मास्टरमाइंड, राजस्थान से सामने आया हैरान करने वाला मामला

राजस्थान के रेवदर थाना क्षेत्र के दांतराई में पुलिस और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़ा नशा कारोबार उजागर हुआ है. इस छापेमारी में पुलिस ने अवैध ड्रग्स के एक बड़े जाल को ध्वस्त किया और लगभग 100 करोड़ रुपये के ड्रग व्यापार को रोकने में सफलता पाई.

UPSC failure leads to becoming a drug smuggler Shocking crime case in Sirohi Rajasthan
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सिरोही: राजस्थान के रेवदर थाना क्षेत्र के दांतराई में पुलिस और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़ा नशा कारोबार उजागर हुआ है. इस छापेमारी में पुलिस ने अवैध ड्रग्स के एक बड़े जाल को ध्वस्त किया और लगभग 100 करोड़ रुपये के ड्रग व्यापार को रोकने में सफलता पाई. जानकारी के अनुसार, इस रैकेट के मास्टरमाइंड की पहचान जालोर निवासी वालाराम के रूप में हुई है, जो दो बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल हो चुका था. इस मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति से हुई जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई.

पुलिस ने कुएं से बरामद किया अवैध सामग्री का जखीरा

रेवदर के दांतराई क्षेत्र में पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस ने एक घर का ताला तोड़ा और एक कुएं से भारी मात्रा में अवैध सामग्री जब्त की. तलाशी के दौरान पुलिस को 35 जरीकेन, 8 बड़े ड्रम केमिकल, कैटलियां, कांच की बोतलें, पाउडर से भरे कट्टे और अन्य लैब उपकरण मिले. इन सबका उपयोग ड्रग्स बनाने के लिए किया जा रहा था. पुलिस का कहना है कि इस छापेमारी से एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जो राजस्थान और आसपास के राज्यों में ड्रग्स की आपूर्ति करता था.

यूपीएससी में असफल होकर अपराध की दुनिया में रखा कदम 

यहां तक कि इस ड्रग रैकेट का मास्टरमाइंड वालाराम यूपीएससी की परीक्षा में दो बार असफल हो चुका था. इस विफलता के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और एक बड़े ड्रग नेटवर्क का हिस्सा बन गया. वालाराम ने ट्रांसपोर्टर, केमिस्ट और डीलरों को साथ मिलाकर एक संगठित ड्रग तस्करी का नेटवर्क तैयार किया. उसका मकसद अब ड्रग्स की अवैध आपूर्ति और कारोबार था.

कुआं था नशे के उत्पादन का केंद्र

इस ड्रग रैकेट का एक प्रमुख केंद्र वह कुआं था, जिसे वालाराम ने एक साथी के नाम से लीज पर लिया था. इस कुएं को जोधाराम पुरोहित ने भावेश उर्फ भूराराम को ठेके पर दिया था. यहां ड्रग्स बनाने के लिए सभी उपकरण और केमिकल एकत्र किए गए थे. इस अवैध ड्रग लैब में 10 किलो एमडी (मेटाम्फेटामाइन) बनाने की योजना थी, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है.

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