UPI पेमेंट ने मचाया धमाल, FY26 में 30% हुई ट्रांजेक्शन ग्रोथ, 240 अरब तक पहुंचने का अनुमान

भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम, UPI, लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और इसके इस्तेमाल में हर साल बढ़ोतरी हो रही है. फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में इसका अनुमानित ट्रांजेक्शन आंकड़ा 240 अरब तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत अधिक है.

UPI growth hits 30% in FY26 transactions may reach 240 billion
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भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम, UPI, लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और इसके इस्तेमाल में हर साल बढ़ोतरी हो रही है. फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में इसका अनुमानित ट्रांजेक्शन आंकड़ा 240 अरब तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत अधिक है. यह वृद्धि नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों द्वारा पुष्टि की गई है, और यह दर्शाता है कि डिजिटल पेमेंट्स की तरफ बढ़ता रुझान अब काफी मजबूत हो चुका है. हालांकि, इस तेज़ गति से बढ़ते UPI इस्तेमाल के बीच, पेमेंट कंपनियां अब सरकार से एक नए रेवेन्यू मॉडल की मांग कर रही हैं.

UPI का लगातार बढ़ता ग्राफ

UPI का ग्रोथ ग्राफ साल दर साल ऊपर की ओर जा रहा है. FY24 में जहाँ 131 अरब ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं FY25 में यह आंकड़ा बढ़कर 185 अरब तक पहुँच गया था. अब, FY26 में यह 240 अरब तक पहुँचने का अनुमान है, जो साल दर साल लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. हालांकि, यह पिछले साल के 41 प्रतिशत ग्रोथ से थोड़ा कम है, फिर भी यह डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल का स्पष्ट संकेत है.

नए रिकॉर्ड और रोजाना बढ़ते ट्रांजेक्शन

UPI ने न सिर्फ सालाना ट्रांजेक्शन में वृद्धि की है, बल्कि दैनिक ट्रांजेक्शन के मामले में भी नए रिकॉर्ड बनाए हैं. इस वित्त वर्ष में, औसतन 657 मिलियन ट्रांजेक्शन रोजाना हो रहे हैं, जो पिछले साल के 506 मिलियन ट्रांजेक्शन से काफी अधिक हैं. इसके अलावा, मार्च में पहली बार 800 मिलियन ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार किया गया. अब सरकार और NPCI का लक्ष्य है कि वे 1 बिलियन ट्रांजेक्शन तक पहुँचें, और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, यह लक्ष्य अगले वित्त वर्ष में संभव नजर आ रहा है.

MDR की फिर से जरूरत

अब जबकि UPI की लोकप्रियता और ट्रांजेक्शन बढ़ रहे हैं, डिजिटल पेमेंट कंपनियां सरकार से MDR (Merchant Discount Rate) को फिर से लागू करने की मांग कर रही हैं. पहले UPI पर 0.3 प्रतिशत का MDR लिया जाता था, जिसे 2020 में हटा दिया गया था. अब कंपनियों का कहना है कि सब्सिडी पर निर्भर रहना एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता. उनका मानना है कि बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने से उन्हें स्थिर कमाई का एक मजबूत स्रोत मिलेगा. खासतौर पर, जिन व्यापारियों का टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए MDR को फिर से लागू करने की मांग की जा रही है.

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