यूपी के आयुष्मान कार्ड धारक ध्यान दें! फौरन कर लें ये जरूरी काम, वरना नहीं मिलेगा योजना का लाभ

Ayushman Bharat Yojna: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है. प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत लाभ उठाने वाले सभी कार्ड धारकों से केवाईसी (KYC) प्रक्रिया दोबारा कराने का आदेश दिया है.

UP To avail Ayushman Yojana benefits it is mandatory for beneficiaries to complete KYC
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Ayushman Bharat Yojna: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है. प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत लाभ उठाने वाले सभी कार्ड धारकों से केवाईसी (KYC) प्रक्रिया दोबारा कराने का आदेश दिया है. अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी. अगर आपने यह कदम नहीं उठाया, तो आपको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा और आपका कार्ड भी रद्द किया जा सकता है.

केवाईसी प्रक्रिया के लिए कदम बढ़ाना जरूरी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए एक नई प्रक्रिया शुरू की है, जिसे ‘आयुष्मान कार्ड बेनिफिशियरी आईडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (ABIS) कहा गया है. इस प्रणाली के तहत अगर कोई भी कार्डधारक केवाईसी नहीं कराता है, तो उसे इस योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है. इसके अलावा, ऐसे कार्ड धारकों का आयुष्मान कार्ड रद्द भी किया जा सकता है.

फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए केवाईसी अनिवार्य

बीते कुछ समय में आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी बिलिंग के कई मामले सामने आए हैं, जिससे प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है. प्रशासन को ये जानकारी मिली है कि कुछ लोग इस योजना का गलत तरीके से फायदा उठा रहे थे. इन मामलों की जांच के दौरान पाया गया कि 61,932 कार्डधारक संदिग्ध हो सकते हैं, जिनकी जांच की जा रही है. अगर किसी कार्ड में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसे तुरंत रद्द कर दिया जाएगा.

संदिग्ध कार्डधारकों की जांच जारी

मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को संदिग्ध आयुष्मान कार्ड की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही आयुष्मान योजना में नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. फिलहाल किसी नए सदस्य को योजना में जोड़ा नहीं जाएगा.

आयुष्मान योजना का उद्देश्य और सुरक्षा

आयुष्मान योजना देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है, जिसमें गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है. इस योजना का उद्देश्य केवल योग्य लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे. केवाईसी प्रक्रिया के जरिए ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि यह योजना सही लाभार्थियों तक पहुंचे और धोखाधड़ी की संभावना को रोका जा सके.

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