CM योगी का बड़ा ऐलान, एक-डेढ़ सप्ताह में लागू होगा आउटसोर्स कमीशन, कर्मचारियों को मिलेगा न्यूनतम मानदेय

सीएम योगी ने घोषणा की कि अगले एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर आउटसोर्स कमीशन लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसके साथ न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाएगा.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जल्द ही आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम उठाने जा रही है. सीएम योगी ने घोषणा की कि अगले एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर आउटसोर्स कमीशन लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसके साथ न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाएगा. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीब, युवा, महिला और किसान को अपनी नीतियों के केंद्र में रखकर काम कर रही है. इसी सोच के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों, मिड-डे मील रसोइयों और ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है. 

सीएम योगी का विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी. राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया. राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला. देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है.

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया. उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया. 

ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं. पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं. किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है. पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है. 

समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था. ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे. उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे. सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है. कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है.

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