यूक्रेन ने रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर किया ड्रोन हमला, फ्यूल की कमी के बीच क्या करेंगे पुतिन?

रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर नए मोड़ पर आ गया है. इस बार यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा व्यवस्था को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला किया है.

Ukraine carried out drone attack on Russia largest oil refinery
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर नए मोड़ पर आ गया है. इस बार यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा व्यवस्था को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला किया है. शनिवार रात यूक्रेन ने रूस के कई क्षेत्रों में भारी ड्रोन हमले किए, जिसमें रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक किरिशी नेफ्टेओर्गसिंटेज पर भी हमला हुआ. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस पहले ही देश के भीतर फ्यूल संकट से जूझ रहा है.

रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन ने एक ही रात में 361 ड्रोन दागे. इन ड्रोनों में से कुछ किरिशी रिफाइनरी तक पहुंचने में सफल रहे और रिफाइनरी के एक हिस्से में आग लग गई. यह हमला हालिया समय में यूक्रेन की ओर से रूस के भीतर सबसे बड़ा और संगठित हमला माना जा रहा है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि अधिकांश ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन फिर भी कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे.

कौन-सी रिफाइनरी थी निशाने पर?

यह हमला रूस की अत्यंत महत्वपूर्ण किरिशी रिफाइनरी पर हुआ, जिसे सर्गुतनेफ्तेगास नामक रूसी ऊर्जा कंपनी संचालित करती है. यह रिफाइनरी हर साल लगभग 1.77 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है. इसका मतलब है कि यह रोजाना करीब 3,55,000 बैरल कच्चा तेल रिफाइन करती है. इस रिफाइनरी की भूमिका रूस की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ईंधन आपूर्ति में अहम मानी जाती है.

लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज्डेंको ने जानकारी दी कि क्षेत्र में तीन ड्रोन को नष्ट किया गया, लेकिन उनमें से गिरते मलबे की वजह से आग भड़क गई थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया. हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस हमले से रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता पर कितना असर पड़ा है.

रूस में ईंधन संकट और बढ़ती चुनौती

यूक्रेन के इस हमले ने रूस की उस समस्या को और गहरा कर दिया है, जिससे वह पहले ही जूझ रहा है- देश के भीतर ईंधन की कमी. युद्ध, बढ़ती घरेलू मांग और यूक्रेनी हमलों के चलते रूस के कई क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की कमी देखी जा रही है. कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं.

स्थिति को काबू में रखने के लिए रूस सरकार ने अस्थायी रूप से गैसोलीन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन अब जब देश की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक पर सीधा हमला हुआ है, तो स्थिति और खराब हो सकती है.

रूस की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?

यूक्रेन के इस हमले ने निश्चित रूप से क्रेमलिन को झकझोर दिया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए यह एक रणनीतिक और राजनीतिक चुनौती बन चुकी है. एक तरफ देश के अंदर ईंधन संकट गहराता जा रहा है, दूसरी ओर युद्ध के मोर्चे पर यूक्रेन की बढ़ती आक्रामकता से रूस की प्रतिष्ठा को झटका लग रहा है.

ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए पुतिन सरकार अब और कठोर सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकती है. पिछले कुछ हफ्तों में रूस ने यूक्रेन पर हवाई और मिसाइल हमले तेज किए हैं, और भविष्य में यह और आक्रामक हो सकता है.

ये भी पढ़ें- भारत में बनेगा SU-57E फाइटर जेट! रूसी टीम करेगी HAL नासिक प्लांट का दौरा, राफेल के साथ भी बड़ी डील?