यूक्रेन जंग में तुर्की के किलर ड्रोन बायरकतार TB-2 की वापसी, रूस में मचा रहे भारी तबाही, देखें Video

तीन वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बार फिर एक पुराने लेकिन बेहद प्रभावशाली हथियार ने वापसी की है- तुर्की निर्मित बायरकतार TB-2 ड्रोन.

Turkey killer drone Bayraktar TB-2 returns to Ukraine war
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

कीव: तीन वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बार फिर एक पुराने लेकिन बेहद प्रभावशाली हथियार ने वापसी की है- तुर्की निर्मित बायरकतार TB-2 ड्रोन. कभी युद्ध के शुरुआती चरणों में रूसी सेना की भारी तबाही का कारण बना यह ड्रोन, अब फिर से यूक्रेन की सेना की रणनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. हाल ही में ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में हुए हमले में इस ड्रोन ने एक रूसी नाव को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया, जिससे कई सैनिकों के हताहत होने की जानकारी सामने आई है.

लंबे समय बाद TB-2 ड्रोन की वापसी

कुछ महीनों से यूक्रेन की ओर से इस ड्रोन का इस्तेमाल कम हो गया था, जिससे यह माना जा रहा था कि TB-2 अपनी उपयोगिता खो चुका है या रूस की वायु रक्षा प्रणाली इसे निष्क्रिय करने में सफल रही है. लेकिन इस हफ्ते हुई कार्रवाई ने साबित कर दिया कि बायरकतार TB-2 अब भी एक खतरनाक और निर्णायक हथियार है.

यूक्रेनी नौसेना ने पुष्टि की है कि इस ड्रोन से ब्लैक सी में रूसी नौसेना के एक तेज रफ्तार नौसैनिक जहाज को निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. इसके अलावा, खेरसॉन और क्रीमिया क्षेत्रों में भी इसी ड्रोन से लक्षित हमले किए गए, जिनमें सैन्य संपत्तियों और रसद ठिकानों को नुकसान पहुंचा.

खेरसॉन में हमलों की जानकारी

यूक्रेन के रक्षा खुफिया विभाग (GUR) ने एक वीडियो जारी कर इस बात की पुष्टि की कि खेरसॉन क्षेत्र में एक रूसी नौका पर सटीक हमला किया गया, जो जालिजनी बंदरगाह के पास स्थित थी. यह हमला स्पिट क्षेत्र से करीब 30 मील दक्षिण-पूर्व में हुआ.

TB-2 ड्रोन अपनी विशेषताओं के कारण एक ही मिशन में कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है, क्योंकि यह सटीक निर्देशित हथियारों को लेकर उड़ सकता है. यही विशेषता इसे पारंपरिक ड्रोन से अलग बनाती है.

युद्ध के शुरुआती चरणों में TB-2 की भूमिका

बायरकतार TB-2 की कहानी यूक्रेन युद्ध के प्रारंभिक चरण से ही जुड़ी हुई है. अक्टूबर 2021 में यूक्रेन ने पहली बार इस ड्रोन का उपयोग तब किया, जब डोनबास क्षेत्र में रूस समर्थित बलों की तोपखाने इकाई एक 122 मिमी D-30 हॉवित्जर को निशाना बनाकर नष्ट किया गया.

इसके बाद से TB-2 ने कई प्रमुख अभियानों में भाग लिया, जिनमें सबसे चर्चित रहा स्नेक आइलैंड पर किया गया हमला. पश्चिमी काला सागर में स्थित इस रणनीतिक द्वीप को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच तीखा संघर्ष रहा है. TB-2 ने यहां रूस की आपूर्ति श्रृंखलाओं और जहाजों पर हमला कर यूक्रेन की बड़ी मदद की.

क्या है बायरकतार TB-2 की ताकत?

तुर्की की Baykar Defense द्वारा निर्मित यह ड्रोन एक Medium Altitude Long Endurance (MALE) श्रेणी का UAV (Unmanned Aerial Vehicle) है. इसकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उड़ान क्षमता: 24 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है
  • उड़ान ऊंचाई: लगभग 27,000 फीट तक
  • अस्त्र-शस्त्र: 4 तक सटीक-निर्देशित मिसाइलें या बम ले जा सकता है
  • कंट्रोल रेंज: लगभग 150 किलोमीटर
  • भूमिका: निगरानी (Surveillance), लक्ष्य भेदन (Targeted Strike), सामरिक हमला (Tactical Support)

TB-2 को कई देशों में परीक्षण और युद्ध में इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे "स्ट्रेटेजिक गेम-चेंजर" माना जाता है.

TB-2 का अगला संस्करण: और भी घातक

Baykar कंपनी ने TB-2 की अगली पीढ़ी का निर्माण भी शुरू कर दिया है, जिसे TB2T-AI कहा जा रहा है. यह वर्जन और भी अधिक उन्नत है:

  • टर्बो इंजन से लैस, जो अधिक ऊंचाई पर तेज उड़ान की सुविधा देता है
  • 30,000 फीट से अधिक की ऑपरेशनल क्षमता
  • AI-आधारित स्मार्ट फ्लाइट सिस्टम, जिससे यह खुद निर्णय ले सकता है कि कब और कहां हमला करना है
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचाव क्षमता, यानी रूस की आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक से पार पाने में सक्षम

आखिर क्यों है ये वापसी अहम?

TB-2 की वापसी यह दर्शाती है कि यूक्रेन ने एक बार फिर असममित युद्ध रणनीति को अपनाया है, जहां बड़े हथियारों और महंगे सिस्टम के बजाय स्मार्ट, मोबाइल और सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

रूस की वायु रक्षा प्रणाली भले ही मजबूत हो, लेकिन TB-2 जैसे ड्रोन छोटे, सटीक और फ्लेक्सिबल होने के कारण इनसे बच निकलने में अक्सर सफल रहते हैं.

इसके अलावा, TB-2 की वापसी यह भी संकेत देती है कि युद्ध की दिशा अब फिर से समुद्री क्षेत्रों और रसद आपूर्ति श्रृंखलाओं की ओर मुड़ रही है, जहां ड्रोन हमले निर्णायक साबित हो सकते हैं.

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