कौन है वो तालिबान, जिसे कई बार मारने की कोशिश कर चुका है पाकिस्तान? जानें क्यों इतना डरते हैं शहबाज-मुनीर

Mufti Noor Wali Mehsud: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव नई ऊंचाई पर पहुंचता जा रहा है और इसके बीच तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कद्दावर नेता नूर वली महसूद का नाम बार-बार सुर्खियों में आ रहा है.

TTP Noor Wali Mehsud Pakistan has tried to kill many times Know why Shahbaz-Munir are afraid
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Mufti Noor Wali Mehsud: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव नई ऊंचाई पर पहुंचता जा रहा है और इसके बीच तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कद्दावर नेता नूर वली महसूद का नाम बार-बार सुर्खियों में आ रहा है. जिन घटनाओं और दावों ने दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बना दिया है, उनका केंद्र नूर वली पर ही का दिखता है, चाहे वह पाकिस्तान का “सबसे वांटेड” शख्स होना हो या उस पर किए जा रहे हमलों की असफलता.

नूर वली महसूद का जन्म 1978 में दक्षिणी पाकिस्तान के पख्तूनख्वा इलाके में हुआ था. पारिवारिक और स्थानीय सामाजिक परिवेश के साथ उसने धार्मिक शिक्षा भी हासिल की; मदरसा सिद्दीकिया उस्पास से उसने इस्लामी अध्ययन किए. पर धीरे-धीरे उसका मार्ग स्थानीय और क्षेत्रीय उग्रवादी गतिविधियों की ओर मुड़ गया.

1990 के दशक में तालिबान के उदय और बाद के वर्षों में कारवां बदलता गया, नूर वली टीटीपी के भीतर उठते-बैठते रहे और कराची में कमान संभाली. 2018 के बाद जब टीटीपी नेतृत्व में फेरबदल हुआ, तब उन्हें संगठन के शीर्ष काउंसिलों में माने जाने लगा. उनके विरोध और पाकिस्तानी सुरक्षा संस्थानों के साथ कड़वे टकराव ने उन्हें राजनीतिक एवं सुरक्षा चुनौती दोनों बना दिया.

हमले, किताबें और आरोप, किसने क्या कहा?

नूर वली के बारे में जिन आरोपों का उल्लेख किया जाता है, उनमें हत्याओं और उच्च-प्रोफ़ाइल हमलों की जिम्मेदारी लेना भी शामिल है. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि उन्होंने एक किताब लिखी और राजनीतिक नेताओं की हत्या की जिम्मेदारी ली, पर इन दावों की पुष्टि अक्सर विवादास्पद स्रोतों या अभियोगी बयानों पर निर्भर रहती है.

पाकिस्तान सरकार द्वारा उन पर कई बार कार्रवाई के प्रयास किए गए, जिनमें हवाई हमले और पकड़ने के ऑपरेशन्स शामिल रहे. पाकिस्तान और उसके सुरक्षा संस्थानों ने नूर वली को एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है; वहीं, उनके समर्थक और कुछ स्थानीय समुदाय यह दावा करते हैं कि उनका प्रभाव स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों का नतीजा है.

एयरस्ट्राइक, बच निकलना और राजनैतिक असफलताएँ

हाल के महीनों में पाकिस्तान की ओर से किए गए सैन्य प्रयासों और संदिग्ध एयरस्ट्राइक की ख़बरें हुईं, जिनमें कभी-कभी दावा किया गया कि नूर वली को निशाना बनाया गया था. लेकिन हर बार, या तो लक्षित व्यक्ति के बच निकलने या घटनाक्रम के आधिकारिक खुलासे के अभाव के कारण स्पष्ट-सीधी सफलता का सबूत सामने नहीं आया. ऐसे हालात ने पाकिस्तान के भीतर फैली चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि तात्कालिक सैन्य कार्रवाई की सियासत और प्रभाव दोनों ही उलझे हुए दिखते हैं.

एक आतंकवादी से कहीं ज्यादा: सामाजिक-स्थानीय जड़ें

नूर वली जैसा कोई भी व्यक्ति सिर्फ़ हिंसा का प्रतीक नहीं रहता, उसके पीछे स्थानीय राजनीतिक गतिशीलता, कबायली गठजोड़, अर्थव्यवस्था और राज्य-सम्बंधित असंतोष भी काम करते हैं. सुरक्षा उपायों और कड़ी प्रतिक्रिया के बावजूद अगर किसी इलाके के लोगों की परेशानियाँ जड़ में बनी रहती हैं, तो ऐसे नेताओं की वापसी या उनके इंक़लाबी या नाराज़ाना संदेशों का असर जारी रह सकता है. इसलिए पाकिस्तान की चुनौती सिर्फ़ एक शख्स को खत्म करने की नहीं, बल्कि समग्र सामाजिक और राजनीतिक कारकों पर काम करने की भी है.

क्या सैन्य समाधान ही एकमात्र विकल्प है?

पाकिस्तान-अफगानिस्तान गतिरोध में तेज प्रतिक्रिया और हवाई कार्रवाई एक अस्थायी व्यवहार्य विकल्प सा दिख सकता है, पर दीर्घकालिक शांति के लिए जरूरी है कि दोनों देश स्थायी संवाद और स्थानीय स्तर पर समाधान की कोशिशें बढ़ाएँ. यदि शांति वार्ताएँ विफल हो रही हैं और प्रत्यक्ष कार्रवाईयों से भी संकट टला नहीं जा रहा, तो समस्या का समाधान केवल सुरक्षा उपायों में नहीं बल्कि राजनीतिक समावेशन, आर्थिक विकल्प और न्याय प्रणाली के सुधार में निहित होगा.

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