इंदौर में 40 घंटे के जाम ने लील लीं कई जिंदगियां, NHAI बोला- बिना काम के घर से क्यों निकलते हो?

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जब मामले की सुनवाई हो रही थी, तो NHAI के वकील ने जाम और मौत की खबरों को भ्रामक बता दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि लोग समय से पहले घर से क्यों निकलते हैं?

traffic jam in Indore NHAI statement
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: ANI

इंदौरः सोचिए, अगर किसी का कोई अपना सड़क पर ही दम तोड़ दे और उसके परिवार वाले केवल यही कह सकें कि "काश, रास्ता खुला होता..." तो वो पीड़ा कितनी असहनीय होगी. इंदौर-देवास रोड पर कुछ दिन पहले जो हुआ, उसने यही हकीकत सामने रख दी. 40 घंटे का लंबा ट्रैफिक जाम, जिसमें तीन जिंदगियां फंस कर खत्म हो गईं. किसी ने समय से हॉस्पिटल नहीं पहुंच पाने के कारण दम तोड़ा, किसी ने गर्मी और घुटन में हार्ट अटैक से जान गंवा दी. मगर जिम्मेदार एजेंसियां क्या कर रही हैं? वो तर्क दे रही हैं, सवाल उठा रही हैं – "लोग इतनी जल्दी घर से क्यों निकलते हैं?"

यह तर्क नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के वकील ने खुद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दिया. जब कोर्ट ने सवाल उठाए कि आखिर ये जाम क्यों हुआ? और क्यों तीन लोग जान गंवा बैठे? तब NHAI का जवाब हर किसी को स्तब्ध कर गया.

"जल्दी क्यों निकलते हैं लोग?"

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जब मामले की सुनवाई हो रही थी, तो NHAI के वकील ने जाम और मौत की खबरों को भ्रामक बता दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि लोग समय से पहले घर से क्यों निकलते हैं? क्या ये मौतें सिर्फ जाम की वजह से हुई हैं? कोर्ट में यह सुनकर मौजूद हर शख्स हैरान रह गया.

क्या वाकई सिर्फ बहाना है?

NHAI ने कहा कि काम में देरी क्रशर यूनिट की हड़ताल की वजह से हुई. मगर कोर्ट ने याद दिलाया कि सड़क निर्माण के लिए तीन से चार महीने का समय मांगा गया था, लेकिन सात महीने बीतने के बाद भी कोई सुधार नहीं दिखा.

ये वही सड़क है, जिसकी मरम्मत को लेकर कोर्ट पहले भी NHAI को आदेश दे चुका है, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिस लापरवाही ने तीन जिंदगियां छीन लीं, उस पर NHAI तर्कों के सहारे बचने की कोशिश कर रहा है.

कैसे गईं तीन जिंदगियां?

40 घंटे के इस जानलेवा जाम में इंदौर के कमल पंचाल, शुजालपुर के बलराम पटेल और गारी पिपल्या के संदीप पटेल की मौत हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी और दम घुटने से कमल पंचाल को हार्ट अटैक आया. वहीं बलराम पटेल को उनके परिवार वाले ट्रैफिक में फंसे हुए ही अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन वक्त की जंग वो हार गए. तीसरे पीड़ित की जान ऑक्सीजन खत्म होने के कारण गई.

जनता कब तक भुगतेगी?

ये कोई पहली घटना नहीं है. इंदौर-देवास रोड की खराब हालत को लेकर पहले भी केस हाईकोर्ट पहुंच चुका है. तब कोर्ट ने NHAI को सख्त आदेश दिए थे कि एक महीने में सड़क दुरुस्त की जाए. मगर सात महीने बीत गए, हालात बदले नहीं. बारिश के दिनों में ये सड़क और भी खतरनाक बन जाती है. क्या हर बार किसी की जान जाएगी तब जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?

अगली सुनवाई की तारीख

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को तय की है. उम्मीद यही है कि इस बार लापरवाह एजेंसियों को केवल चेतावनी नहीं, सख्त जवाबदेही दी जाएगी. जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए यह एक कानूनी लड़ाई से कहीं बढ़कर है.

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