OpenAI और Microsoft की इस डील ने रचा इतिहास, $500 बिलियन की हुई कंपनी

OpenAI Microsoft Partnership: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. OpenAI और Microsoft के बीच हुए नए समझौते ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. 

This deal between OpenAI and Microsoft created history becoming a $500 billion company
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OpenAI Microsoft Partnership: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. OpenAI और Microsoft के बीच हुए नए समझौते ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. 

इस डील के बाद OpenAI की वैल्यूएशन करीब $500 बिलियन (लगभग ₹42 लाख करोड़) तक पहुंच गई है. यह सौदा न केवल OpenAI की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि कंपनी को अपने बिजनेस स्ट्रक्चर को फिर से व्यवस्थित करने और भविष्य में नई फंडिंग जुटाने के रास्ते भी खोलेगा.

2019 की पुरानी डील और उसकी सीमाएं

2019 में Microsoft और OpenAI के बीच हुई साझेदारी के तहत, माइक्रोसॉफ्ट ने OpenAI को अपनी क्लाउड सर्विस, Azure के इस्तेमाल की अनुमति दी थी. इसके बदले OpenAI को एक्सक्लूसिव तौर पर Microsoft के इंफ्रास्ट्रक्चर का ही उपयोग करना पड़ता था. उस समय यह डील AI डेवलपमेंट के लिए फायदेमंद मानी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे ChatGPT लोकप्रिय हुआ और यूज़र्स की संख्या करोड़ों में पहुंची, कंपनी की कंप्यूटिंग पावर और फंडिंग की जरूरतें तेजी से बढ़ने लगीं.

पुराने एग्रीमेंट की शर्तों के कारण OpenAI बाहरी निवेशकों से पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा पा रहा था. यही वजह है कि अब नए समझौते में OpenAI को अधिक स्वतंत्रता दी गई है, ताकि वह अपने विस्तार और अनुसंधान के लिए नई निवेश संभावनाओं का उपयोग कर सके.

OpenAI का नया रूप: Public Benefit Corporation (PBC)

नई डील के तहत OpenAI ने खुद को Public Benefit Corporation (PBC) के रूप में पुनर्गठित करने की प्रक्रिया शुरू की है. इसका अर्थ यह है कि कंपनी अब केवल लाभ कमाने के बजाय अपने सामाजिक और वैज्ञानिक मिशन को भी प्राथमिकता देगी.
इस री-स्ट्रक्चर के बाद Microsoft, OpenAI Group PBC में 27% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी निवेशक बनी रहेगी. यह हिस्सेदारी अब लगभग $135 बिलियन की वैल्यू तक पहुंच सकती है.

दिलचस्प बात यह है कि नियंत्रण अभी भी OpenAI Foundation के पास रहेगा, जो एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है. यानी कंपनी के संचालन में पारदर्शिता और सामाजिक हितों का ध्यान रखा जाएगा.

OpenAI Foundation के चेयरमैन ने कहा कि, “इस नए कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से हमें फंडिंग जुटाने और रिसर्च को आगे बढ़ाने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी. साथ ही, कंपनी को AGI (Artificial General Intelligence) के विकास के लिए बड़े संसाधनों तक सीधी पहुंच भी मिलेगी.”

Azure क्लाउड से मिलेगी नई रफ्तार

इस डील का एक अहम पहलू यह भी है कि OpenAI अब Microsoft Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म पर और अधिक निर्भर रहेगा. दोनों कंपनियों के बीच अरबों डॉलर का नया क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट हुआ है, जिसके तहत OpenAI $250 बिलियन तक की क्लाउड सेवाएं खरीदेगा.

हालांकि, इस समझौते में एक बड़ा बदलाव यह है कि Microsoft को अब OpenAI की क्लाउड सर्विसेज़ पर ‘Right of First Refusal’ यानी प्राथमिक अधिकार नहीं मिलेगा. इसका अर्थ यह है कि भविष्य में OpenAI किसी और कंपनी, जैसे Google Cloud या Amazon Web Services (AWS) की सेवाएं भी ले सकता है. इस कदम से OpenAI को लचीलापन (flexibility) मिलेगा और प्रतिस्पर्धा भी बनी रहेगी.

Microsoft को भी बड़ा फायदा

जहां एक तरफ OpenAI को स्वतंत्रता और पूंजी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर Microsoft के लिए भी यह डील एक बड़ी रणनीतिक सफलता है. कंपनी का Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म अब दुनिया के सबसे बड़े AI प्रोजेक्ट्स में से एक के साथ जुड़ा रहेगा, जिससे उसका बाजार में वर्चस्व और मजबूत होगा.

Microsoft के शेयरों में इस खबर के बाद 2.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. टेक विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से Microsoft को Google Cloud और Amazon AWS जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले मजबूत बढ़त मिल सकती है.

एलन मस्क की आलोचना और पुरानी बहस

OpenAI की स्थापना के शुरुआती दौर में एलन मस्क भी कंपनी के सह-संस्थापकों में से एक थे. हालांकि बाद में उन्होंने कंपनी छोड़ दी और अपना हिस्सा बेच दिया. मस्क लंबे समय से OpenAI पर आरोप लगाते रहे हैं कि उसने अपनी “नॉन-प्रॉफिट विज़न” से समझौता कर लिया है और अब यह एक “फॉर-प्रॉफिट टेक कंपनी” बन चुकी है.

इस नई डील के बाद मस्क जैसे आलोचकों के सवाल और तेज हो सकते हैं, हालांकि OpenAI प्रबंधन का कहना है कि PBC स्ट्रक्चर कंपनी को मिशन और प्रॉफिट दोनों में संतुलन बनाने की अनुमति देगा.

क्या OpenAI लाएगा IPO?

इस बड़े री-स्ट्रक्चर के बाद टेक इंडस्ट्री में यह चर्चा भी गर्म है कि OpenAI आने वाले वर्षों में IPO (Initial Public Offering) ला सकता है.

हालांकि कंपनी ने इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन और निवेशक रुचि को देखते हुए, OpenAI का पब्लिक मार्केट में उतरना अब केवल समय की बात है.

क्यों है यह डील ऐतिहासिक

यह समझौता केवल दो कंपनियों के बीच का कॉर्पोरेट करार नहीं, बल्कि AI इंडस्ट्री के अगले दशक की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है. OpenAI के पास अब न केवल Microsoft जैसी टेक दिग्गज की तकनीकी शक्ति है, बल्कि वित्तीय स्वतंत्रता और वैश्विक निवेश का अवसर भी है. वहीं Microsoft को इससे Azure क्लाउड बिजनेस और AI इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों में तेज गति से ग्रोथ हासिल करने का मौका मिलेगा.

यह डील इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में AI इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों चरम पर होंगे, और OpenAI इस दौड़ में सबसे आगे रहने की तैयारी कर चुका है.

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