चैंपियंस ट्रॉफी से पहले जिन फैसलों पर थे सवाल, वही बदल रहे मैच के परिणाम, भारत की जीत के X फैक्टर

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के लिए भारतीय टीम के चयन पर काफी चर्चाएं हुईं, खासकर जब यशस्वी जायसवाल की जगह वरुण चक्रवर्ती को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया. इस फैसले से टीम में स्पिनर्स की संख्या बढ़कर पांच हो गई, जिसने कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया.

The decisions on which there were questions before the Champions Trophy the X factor for Indias victory
भारतीय क्रिकेट टीम/Photo- ANI

नई दिल्ली: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के लिए भारतीय टीम के चयन पर काफी चर्चाएं हुईं, खासकर जब यशस्वी जायसवाल की जगह वरुण चक्रवर्ती को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया. इस फैसले से टीम में स्पिनर्स की संख्या बढ़कर पांच हो गई, जिसने कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया.

क्या टीम इंडिया ने ज्यादा स्पिनर्स चुने?

भारत के दिग्गज स्पिनर आर अश्विन ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "समझ नहीं आता कि टीम इंडिया इतने ज्यादा स्पिनर्स को दुबई क्यों ले जा रही है." पूर्व क्रिकेटर दिनेश कार्तिक ने भी अपनी राय देते हुए कहा कि पांच स्पिनर्स को टीम में रखना कुछ ज्यादा लग रहा है. हालांकि, टूर्नामेंट के मध्य तक आते-आते यही रणनीति भारत के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई.

स्पिनर्स का जलवा: भारत की जीत की कुंजी

जब टीम इंडिया ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया, तब कप्तान रोहित शर्मा ने बड़ा फैसला लेते हुए चार स्पिनर्स को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया. यह निर्णय गेम-चेंजर साबित हुआ.

न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारतीय स्पिनर्स ने 9 विकेट चटकाए, जो चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में स्पिनर्स द्वारा किया गया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बन गया. इससे पहले, 2004 में पाकिस्तान के स्पिनर्स ने कीनिया के खिलाफ 8 विकेट झटके थे.

वरुण चक्रवर्ती: भारत का ट्रंप कार्ड

कप्तान रोहित शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच के बाद कहा, "वरुण में कुछ खास है. हम देखना चाहते थे कि वह कितने प्रभावी हो सकते हैं."

वरुण चक्रवर्ती 2021 के टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार टीम इंडिया का हिस्सा बने थे, लेकिन तब वह कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके थे. हालांकि, आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने टीम में वापसी की और इस बार उन्होंने खुद को साबित भी किया.

न्यूजीलैंड के खिलाफ, वरुण ने अपने दूसरे ओवर में ही विल यंग को बोल्ड कर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई. बाद में, उन्होंने सैंटनर और हेनरी के विकेट भी झटके, जिससे भारत को 44 रनों से जीत हासिल हुई.

भारतीय स्पिनर्स का दबदबा

टीम इंडिया के अन्य स्पिनर्स भी इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में हैं:

कुलदीप यादव: भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर, जिन्होंने अब तक 6 विकेट चटकाए हैं.

अक्षर पटेल: 4.4 की किफायती इकोनॉमी रेट से गेंदबाजी करते हुए 3 मैचों में 4 विकेट झटके.

रवींद्र जडेजा: 4.7 की इकोनॉमी रेट से शानदार गेंदबाजी, भले ही सिर्फ 2 विकेट मिले हों.

भारतीय स्पिनर्स ने न केवल विकेट लिए, बल्कि विरोधी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा, जिससे टीम को मैच जीतने में बड़ी मदद मिली.

दुबई की पिच और भारत को मिला फायदा

भारत ने टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था, जिसके कारण उसे अपने सभी मैच दुबई में खेलने पड़े. दुबई की पिचें आमतौर पर स्पिनर्स को मदद करती हैं, और भारतीय गेंदबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया.

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी माना कि भारत को एक ही मैदान पर खेलने का फायदा मिल रहा है. दक्षिण अफ्रीका के रसी वैन डेर ड्यूसेन ने भी कहा कि लगातार एक ही मैदान पर खेलना किसी भी टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

नतीजा: सही चयन, सही रणनीति

चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत में जिस फैसले पर सवाल उठाए गए थे, वही भारत के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुआ. स्पिनर्स के शानदार प्रदर्शन के चलते टीम इंडिया सेमीफाइनल में अपनी जगह बना चुकी है और अब ट्रॉफी जीतने की प्रबल दावेदार नजर आ रही है.

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