WhatsApp Username Feature: यूजरनेम से पहचान करने वाले इस फीचर पर अब सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस नए फीचर की समीक्षा कर सकती है. अगर जरूरी हुआ तो सरकार WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भी भेज सकती है. सरकार को शक है कि इस बदलाव से ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामले बढ़ सकते हैं.
सरकार क्या जांच करेगी?
सरकार इस फीचर की दो मुख्य बातों की जांच करेगी:
सरकार यह भी देखेगी कि क्या इस नए सिस्टम से यूजर्स का निजी डेटा सुरक्षित रहेगा या नहीं. अगर किसी तरह का खतरा सामने आता है, तो Meta से जवाब मांगा जा सकता है.
क्यों बढ़ी चिंता?
हाल ही में WhatsApp ने मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम सिस्टम शुरू करने की बात कही है. इसके बाद कई एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे ठग लोगों के लिए फर्जी पहचान बनाना आसान हो सकता है.
एक सीनियर IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने कहा कि इस तरह का सिस्टम पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह की समस्या पहले Telegram में भी देखी गई है, जहां साइबर फ्रॉड और इन्वेस्टमेंट स्कैम के मामले बढ़े हैं. उनका कहना है कि WhatsApp के भारत में करोड़ों यूजर्स हैं, इसलिए छोटे से बदलाव का भी बड़ा असर हो सकता है.
एक्सपर्ट्स की चिंता
एंटरप्रेन्योर और इन्फ्लुएंसर अंकुर वारिकू ने भी इस फीचर पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि भारत में कई लोग डिजिटल सुरक्षा को अच्छे से नहीं समझते. ऐसे में लोग आसानी से धोखे में आ सकते हैं. उनके मुताबिक, साइबर अपराधी मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों से पैसे मांग सकते हैं, और आम लोग असली और नकली पहचान में फर्क नहीं कर पाएंगे.
आगे क्या होगा?
फिलहाल Meta की तरफ से इस फीचर की सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है. सरकार की जांच के बाद इस पर आगे फैसला लिया जा सकता है.
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