Google का नया AI डिटेक्शन फीचर लॉन्च, अब फर्जी फोटो और वीडियो की होगी तुरंत पहचान; जानें पूरी डिटेल

Google SynthID: दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के दौर में अब टेक दिग्गज कंपनी Google ने अपनी खास पहचान तकनीक SynthID को और बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है.

tech Google new AI detection feature launched fake photos and videos will be identified immediately
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Google SynthID: दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के दौर में अब टेक दिग्गज कंपनी Google ने अपनी खास पहचान तकनीक SynthID को और बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है. कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में यूजर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है. AI जनरेटेड कंटेंट की बढ़ती संख्या को देखते हुए Google इसे डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है.

Search और Chrome में भी मिलेगा SynthID का सपोर्ट

अब तक SynthID तकनीक मुख्य रूप से Google के Gemini AI सिस्टम के साथ जुड़ी हुई थी, लेकिन कंपनी ने ऐलान किया है कि जल्द ही इसे Google Search और Chrome ब्राउज़र में भी इंटीग्रेट किया जाएगा. यानी भविष्य में यूजर्स सीधे सर्च रिजल्ट या ब्राउज़र के जरिए यह पहचान सकेंगे कि कोई कंटेंट AI आधारित है या नहीं.

इस बड़े अपडेट की घोषणा Google और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet के CEO Sundar Pichai ने कैलिफोर्निया में आयोजित Google I/O 2026 इवेंट के दौरान की. उन्होंने कहा कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंटरनेट पर भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है और इसी दिशा में SynthID अहम भूमिका निभाएगा.

क्या है SynthID और कैसे करता है काम?

Google ने पहली बार SynthID तकनीक को साल 2023 में पेश किया था. यह एक तरह का डिजिटल और इनविज़िबल वॉटरमार्क सिस्टम है, जिसे AI द्वारा बनाए गए या AI टूल्स से एडिट किए गए कंटेंट में छिपाकर जोड़ा जाता है.

खास बात यह है कि यह वॉटरमार्क सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता, लेकिन सिस्टम इसकी मदद से आसानी से पहचान सकता है कि कोई इमेज, वीडियो या ऑडियो AI से तैयार किया गया है या नहीं. Google का मानना है कि जनरेटिव AI के बढ़ते प्रभाव के बीच कंटेंट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसी तकनीक बेहद जरूरी हो चुकी है.

AI तस्वीर दिखाकर समझाया फेक कंटेंट का खतरा

Google I/O इवेंट के दौरान सुंदर पिचाई ने एक वायरल AI-जनरेटेड तस्वीर का जिक्र भी किया, जिसमें वह खुद, Elon Musk, Jensen Huang और Sam Altman एक साथ मैकडॉनल्ड्स में खाना खाते नजर आ रहे थे.

पिचाई ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह तस्वीर पूरी तरह नकली है क्योंकि वह हैमबर्गर नहीं खाते. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आम लोगों के लिए AI और असली तस्वीरों के बीच फर्क समझना हमेशा आसान नहीं होता. ऐसे में SynthID जैसे टूल यूजर्स को सही जानकारी पहचानने में बड़ी मदद दे सकते हैं.

दूसरी AI कंपनियां भी जुड़ रहीं साथ

Google का कहना है कि केवल एक कंपनी के स्तर पर ऐसी तकनीक को लागू करना काफी नहीं होगा. अगर AI कंटेंट की पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाना है, तो अलग-अलग टेक कंपनियों को एक साझा मानक अपनाना होगा.

इसी दिशा में अब कई बड़ी कंपनियां भी आगे आ रही हैं. Google के मुताबिक OpenAI, Kakao और ElevenLabs जैसी कंपनियां भी SynthID स्टैंडर्ड अपनाने की तैयारी में हैं. वहीं Nvidia पहले ही इस पहल का हिस्सा बन चुकी है.

100 अरब से ज्यादा फाइलों पर लग चुका है वॉटरमार्क

Google ने जानकारी दी है कि अब तक करीब 100 अरब से अधिक फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलों पर SynthID वॉटरमार्क लगाया जा चुका है. कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक AI कंटेंट पहचानने के लिए इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे AI टूल्स ज्यादा एडवांस होते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक कंटेंट, डीपफेक वीडियो और एडिटेड तस्वीरों की पहचान करना और मुश्किल होता जाएगा. ऐसे में SynthID जैसी तकनीक इंटरनेट पर भरोसा बनाए रखने और गलत जानकारी के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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