US bans Fable 5 and Mythos 5: AI कंपनी Anthropic ने 9 जून 2026 को अपने नए मॉडल Fable 5 और Mythos 5 लॉन्च किए थे. लेकिन लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया. 12 जून की रात अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि इन दोनों AI मॉडल्स का एक्सेस विदेशी नागरिकों के लिए तुरंत बंद किया जाए. आदेश में यह भी कहा गया कि यह रोक अमेरिका में रहने वाले विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होगी, यहां तक कि Anthropic के अपने विदेशी स्टाफ पर भी.
कंपनी ने क्यों बंद किया एक्सेस?
Anthropic का कहना है कि वह यह साफ नहीं कर सकती कि कौन यूजर विदेशी नागरिक है और कौन नहीं. इसी वजह से कंपनी ने सुरक्षा को देखते हुए Fable 5 और Mythos 5 को सभी यूजर्स के लिए बंद कर दिया. हालांकि कंपनी के बाकी Claude मॉडल अभी भी पहले की तरह काम कर रहे हैं.
“जेलब्रेक” को लेकर विवाद
अमेरिकी सरकार ने यह भी दावा किया कि किसी संस्था ने Fable 5 को “जेलब्रेक” कर लिया था. जेलब्रेक का मतलब है AI सिस्टम को इस तरह से ट्रिक करना कि वह ऐसी जानकारी भी दे दे, जो सामान्य तौर पर वह देने से मना करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई AI से गलत या खतरनाक जानकारी पूछे, तो वह मना कर देता है, लेकिन जेलब्रेक में उसे गलत तरीके से जवाब देने के लिए मजबूर किया जाता है.
सुरक्षा को लेकर चिंता
सरकार को चिंता थी कि इन AI मॉडल्स का इस्तेमाल साइबर हमलों या गलत तरह की रासायनिक और जैविक जानकारी हासिल करने में हो सकता है. लेकिन Anthropic ने इन दावों को गलत बताया है. कंपनी का कहना है कि सरकार द्वारा दिखाया गया डेमो बहुत सीमित था और इससे कोई बड़ा खतरा साबित नहीं होता. कंपनी ने यह भी कहा कि यह एक गलतफहमी हो सकती है और वे जल्द ही इन मॉडल्स की पहुंच बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
AI नियमों में बड़ा बदलाव
यह पहली बार माना जा रहा है जब अमेरिकी सरकार ने किसी AI कंपनी के लाइव मॉडल पर एक्सपोर्ट कंट्रोल जैसा सख्त कदम उठाया है. अब तक ऐसे नियम सिर्फ चिप्स और हार्डवेयर पर लगाए जाते थे, लेकिन अब AI सॉफ्टवेयर भी इसके दायरे में आ गया है. इसे AI रेगुलेशन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
भारत पर असर
भारत के लिए यह मामला काफी अहम है क्योंकि कई स्टार्टअप, IT कंपनियां और डेवलपर्स Anthropic के API पर काम करते हैं. Fable 5 पर आधारित कई प्रोजेक्ट अचानक रुक गए, जिससे कामकाज पर असर पड़ा है. यह घटना यह भी दिखाती है कि भारत अभी भी विदेशी AI टेक्नोलॉजी पर काफी निर्भर है और अपने खुद के AI सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना कितना जरूरी है.
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