Farmers Protest: पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान प्रदर्शन में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला. किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की रिहाई के बाद किसानों ने अपना विरोध खत्म करने का फैसला किया और शंभू बॉर्डर से वापस लौटना शुरू कर दिया.
गुरनाम सिंह चढ़ूनी हुए रिहा
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पुलिस ने सोमवार को हिरासत में लिया था. मंगलवार को उन्हें रिहा कर दिया गया. उनकी रिहाई के बाद किसानों में राहत का माहौल देखने को मिला.
सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत
मंगलवार को शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर इकट्ठा हुए. इस बीच हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसान नेता सरवन सिंह पंढेर से मुलाकात की और कई मुद्दों पर बातचीत की. बातचीत के दौरान किसानों की दो प्रमुख मांगों पर सहमति बनी. पहली, गुरनाम सिंह चढ़ूनी की रिहाई और दूसरी, केंद्रीय कृषि मंत्री से किसानों की मुलाकात कराने की मांग.
#WATCH | Shambhu Border (Punjab-Haryana border): Ajay Singh Tomar, DC, Ambala says, "Highly respected union leaders are present here, and we have held discussions with them under the leadership of the Agriculture Minister. They had two main demands: first, to secure a meeting… https://t.co/u0OtWkyFsd pic.twitter.com/TJrjac7jVW
— ANI (@ANI) July 21, 2026
क्या बोले सरवन सिंह पंढेर?
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सभी किसान नेताओं और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की गई थी. उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद गुरनाम सिंह चढ़ूनी और बीएम सिंह को रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अब रिहाई के बाद किसान आगे की रणनीति तय करेंगे और बातचीत के आधार पर अगला फैसला लिया जाएगा.
किसानों ने खत्म किया प्रदर्शन
किसान नेता तेजवीर सिंह ने कहा कि सभी साथियों की रिहाई के बाद किसानों ने धरना खत्म करने का फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि सभी प्रदर्शन स्थलों से मोर्चे हटा लिए गए हैं और किसान शांतिपूर्वक अपने घर लौट रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ पूरा मामला शांतिपूर्ण रहा और अब सड़कें भी खोल दी गई हैं.
किसान क्यों कर रहे थे प्रदर्शन?
किसान भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर यह समझौता लागू होता है, तो अमेरिका से सोयाबीन, अनाज और सूखे मेवे जैसे कृषि उत्पाद भारत में बड़ी मात्रा में आ सकते हैं. किसानों को डर है कि इससे देश के किसानों की आय और खेती पर असर पड़ सकता है.
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