Ganeshotsav 2026: गणेश महोत्सव के आगमन में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बार गुजरात के सूरत में गणेशोत्सव को खास बनाने के लिए एक अनोखी तैयारी की जा रही है. शहर के वेसू इलाके में लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति की ओर से विशाल महल के स्वरूप में गणेश पंडाल तैयार किया जा रहा है. इस आयोजन में भव्यता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देखने को मिलेगा.
40 हजार वर्ग वार में तैयार हो रहा भव्य पंडाल
वेसू इलाके में गणेश उत्सव के लिए करीब 40 हजार वर्ग वार क्षेत्र में विशाल पंडाल बनाया जा रहा है. इसकी थीम राजा के दरबार पर आधारित है. आयोजकों का कहना है कि जब गणपति को राजा का स्वरूप माना जाता है, तो उनका दरबार भी उसी भव्य अंदाज में सजाया जाना चाहिए. इसी सोच के साथ पंडाल को महलनुमा डिजाइन दिया जा रहा है, जिस पर कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं.
22 फीट ऊंची होगी गणपति की प्रतिमा
इस गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण करीब 22 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा होगी. खास बात यह है कि इस विशाल प्रतिमा को तैयार करने में लगभग 700 किलोग्राम टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है. आयोजकों ने प्रतिमा को हल्का और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए इस खास सामग्री का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.
विसर्जन के बाद प्रतिमा खंडित होने की चिंता
समिति की आयोजक पूजा के मुताबिक गणेश उत्सव के दौरान कई दिनों तक विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की जाती है, लेकिन विसर्जन के समय प्रतिमाओं के खंडित होने की स्थिति को लेकर चिंता रहती है. इसी वजह से समिति ने ऐसी प्रतिमा तैयार करने का विचार किया, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर हो और विसर्जन के बाद कम नुकसान पहुंचाए. आयोजकों का मानना है कि आस्था के साथ प्रकृति की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाई जानी चाहिए.
10 दिनों तक भक्ति और संगीत का संगम
गणेश उत्सव के दौरान पंडाल में लगातार धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. अलग-अलग गायकों को बुलाकर भजन और धार्मिक गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां भी कराई जाएंगी. ऐसे में श्रद्धालुओं को गणपति बप्पा के दर्शन के साथ भक्ति और संगीत का अनुभव भी मिलेगा.
बुजुर्गों और महिलाओं को किया जाएगा सम्मानित
इस आयोजन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की भी तैयारी है. समिति की ओर से वृद्धाश्रम और शेल्टर होम में रहने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा. उत्सव के दौरान उनका सम्मान भी किया जाएगा. आयोजकों का कहना है कि गणेशोत्सव की खुशियां समाज के उन लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए, जो किसी वजह से अपने परिवार से दूर हैं.
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सूरत का यह गणेशोत्सव सिर्फ विशाल पंडाल और 22 फीट की प्रतिमा के लिए ही खास नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा. टिश्यू पेपर से तैयार की जा रही गणेश प्रतिमा और सामाजिक गतिविधियों के जरिए समिति धार्मिक आस्था को सेवा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने की कोशिश कर रही है.
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