शहबाज-मुनीर का हाल बेहाल! PoK बवाल के बीच पाकिस्तान से आजादी की मांग, बलोच नेता ने जारी किया पत्र

Balochistan Crisis: पड़ोसी देश पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है, जहां अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोर्चा खुल चुका है. बलूच राष्ट्रवादी नेता मीर यार बलोच ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि अब सिर्फ बलूचिस्तान नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भी पाकिस्तान की हुकूमत से आज़ाद होना चाहिए.

Shahbaz-Munir Baloch leader issues letter demanding independence from Pakistan amid PoK uproar
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Balochistan Crisis: पड़ोसी देश पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है, जहां अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोर्चा खुल चुका है. बलूच राष्ट्रवादी नेता मीर यार बलोच ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि अब सिर्फ बलूचिस्तान नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भी पाकिस्तान की हुकूमत से आज़ाद होना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि “हमें अब पाकिस्तान से भी आज़ादी चाहिए,” जो पाकिस्तान के अंदर राजनीतिक और सैन्य सर्कलों में भारी खलबली मचा रहा है.

पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र PoK में पिछले कुछ समय से हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो धीरे-धीरे एक बड़े जनआक्रोश में बदल गए हैं. 29 सितंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन तेज़ी से बढ़ा, जिससे अब तक दस से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. इस हिंसा ने वहां की राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है.

PoK में बिगड़ते हालात और विस्फोटक विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के नेतृत्व में 38 मांगों का एक चार्टर सरकार को सौंपा था. इन मांगों में बिजली की बढ़ती दरों में कटौती, टैक्सों में राहत और क्षेत्रीय स्वशासन की मांग प्रमुख थी. बातचीत के असफल होने के बाद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए, जो पुलिस के साथ झड़पों में तब्दील हो गईं.

तीन पुलिसकर्मियों सहित 10 से अधिक लोगों की मौत के बाद, सरकार ने आखिरकार प्रदर्शनकारियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन मीर यार बलोच ने इस समझौते को “नकली शांति” बताया. उनका मानना है कि PoK में जो हो रहा है, वह पाकिस्तान की वास्तविक सरकार और उसके तानाशाही रवैये का आईना है, जो अपने नागरिकों को ग़ुलाम बनाए हुए है और हर आवाज को बंद करने के लिए हिंसा का सहारा ले रहा है.

PoK एक “कैदखाना” बन चुका है

मीर यार बलोच ने स्पष्ट किया कि PoK की जनता अब पाकिस्तान की गुलामी नहीं, बल्कि अपनी आज़ादी चाहती है. उन्होंने कहा कि केवल बलूचिस्तान नहीं, बल्कि पूरे PoK को पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीतियों से मुक्त होना चाहिए. उनके अनुसार इस क्षेत्र में ISI और पाक सेना ने कई हथियारबंद समूहों और मिलिशिया को खड़ा किया है, जो वहां की जनता पर अत्याचार कर रहे हैं. बलोच ने कहा, “यह इलाका अब कोई जन्नत नहीं, बल्कि जेल जैसा बन चुका है, जहां लोग आज़ाद नहीं, बल्कि भय और दमन के साए में जी रहे हैं.”

डेथ स्क्वॉड्स और मिलिशिया का निर्माण

मीर यार बलोच ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने पिछले दो दशकों में लगभग 50,000 हथियारबंद मिलिशिया और डेथ स्क्वॉड्स बनाए हैं, जिनका उद्देश्य बलूचिस्तान और PoK में स्वतंत्रता की आवाज़ों को दबाना है. उन्होंने कहा कि इन समूहों को सेना से हथियार, वाहन, पहचान पत्र और सैटेलाइट फोन प्रदान किए जाते हैं, साथ ही इन पर अरबों रुपए का बजट खर्च किया जाता है.

बलोच ने बताया कि इन गुटों का इस्तेमाल झूठे धार्मिक प्रचार (‘जिहाद’ के नाम पर) करने, आतंक फैलाने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किया जाता है. उनका मानना है कि इस प्रकार के दमन का कोई वैध औचित्य नहीं है और यह केवल नागरिकों को डराने-धमकाने का एक तरीका है.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मदद की अपील

मीर यार बलोच ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य वैश्विक संस्थानों से अपील की है कि वे PoK और बलूचिस्तान के लोगों के लिए एक स्वतंत्र मानवाधिकार जांच आयोग भेजें और पाकिस्तान की दमनात्मक नीतियों को रोकने के लिए दबाव बनाएं. उन्होंने कहा, “हम अब केवल अपने क्षेत्र के लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं जो पाकिस्तान के अत्याचारों से पीड़ित हैं.” उनका यह बयान विश्व समुदाय को जागरूक करने और पाकिस्तान में हो रही मानवाधिकार हननों को रोकने की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है.

पाकिस्तान के भीतर बढ़ती अस्थिरता

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी विद्रोह और आजादी की मांगें अब PoK तक फैल गई हैं. PoK में बढ़ती अस्थिरता और हिंसा ने वहां की राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर किया है. स्थानीय लोग ना केवल सामाजिक-आर्थिक मुद्दों जैसे बिजली की बढ़ती कीमतों और टैक्सों से परेशान हैं, बल्कि वे राजनीतिक आज़ादी और स्थानीय स्वशासन के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं.

पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों की दमनकारी रणनीतियाँ, जो हथियारबंद समूहों के माध्यम से क्षेत्र में नियंत्रण बनाए रखती हैं, इस अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं. इस प्रकार के उपाय असल में जनता के बीच विद्रोह को बढ़ावा देते हैं, जो पाकिस्तान के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकते हैं.

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