इजरायल में चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी यशार पार्टी के प्रमुख और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को सौंपने का फैसला किया है. राष्ट्रपति ने शनिवार, 7 नवंबर की शाम इसकी घोषणा की. इस फैसले को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. नेतन्याहू चुनाव के बाद भी सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा सके.
इजरायल में अब आगे क्या होगा?
राष्ट्रपति हर्जोग रविवार शाम 5 बजे राष्ट्रपति आवास पर आयोजित कार्यक्रम में आइजेनकोट को औपचारिक रूप से सरकार बनाने का न्योता देंगे. इसके बाद उन्हें नई सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा. अगर इस दौरान वह बहुमत जुटाने में सफल नहीं होते हैं तो राष्ट्रपति उन्हें 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं.
हालांकि, अगर आइजेनकोट सरकार बनाने में नाकाम रहते हैं तो राष्ट्रपति एक बार फिर नेतन्याहू को मौका दे सकते हैं. ऐसे में इजरायल में आने वाले दिनों में राजनीतिक बातचीत और गठबंधन बनाने की कोशिशें तेज होने वाली हैं.
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— Gadi Eisenkot - גדי איזנקוט (@gadi_eisenkot) November 7, 2026
राष्ट्रपति ने सभी पार्टियों से की थी बातचीत
राष्ट्रपति हर्जोग ने बुधवार और गुरुवार को चुनाव जीतकर संसद पहुंची सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की थी. इसके बाद उन्होंने नेतन्याहू और आइजेनकोट के गुटों सहित अलग-अलग विचारधारा वाले नेताओं से भी चर्चा की. शनिवार शाम को उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दोनों नेताओं को दी.
राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि आइजेनकोट को रविवार को राष्ट्रपति आवास पर बुलाया गया है, जहां उन्हें सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. इस फैसले के बाद आइजेनकोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब देश में राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने का समय आ गया है. उन्होंने इसके लिए पूरी कोशिश करने की बात कही.
आइजेनकोट को कैसे मिली नेतन्याहू पर बढ़त?
27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि, उनके नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें ही मिलीं. इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है.
दूसरी तरफ, आइजेनकोट की यशार पार्टी को 21 सीटें मिलीं, जबकि उनके चेंज ब्लॉक गठबंधन के खाते में 48 सीटें आईं. आइजेनकोट को तब बढ़त मिली, जब 19 सीटें जीतने वाली दो अरब पार्टियों ने राष्ट्रपति के सामने उनके नाम का समर्थन किया. इनमें जॉइंट लिस्ट की 12 और राम पार्टी की 7 सीटें शामिल हैं.
राष्ट्रपति के साथ हुई चर्चा में आइजेनकोट को कुल 67 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने समर्थन जताया. वहीं, नेतन्याहू के गठबंधन की सहयोगी यूनाइटेड तोराह जुदाइज्म ने किसी भी नेता के नाम का समर्थन नहीं किया. इस पार्टी के पास 7 सीटें हैं.
आइजेनकोट के लिए सरकार बनाना आसान नहीं
राष्ट्रपति से सरकार बनाने का न्योता मिलने के बावजूद आइजेनकोट की राह आसान नहीं है. उनके गठबंधन में शामिल कुछ कट्टरपंथी नेता अरब पार्टियों के समर्थन के खिलाफ हैं. ऐसे में उनके लिए सभी सहयोगियों को एक साथ रखना बड़ी चुनौती होगी.
इसी बीच यशार पार्टी ने शनिवार रात एक बयान देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी. पार्टी ने कहा कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगी भी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, अभी तक नेतन्याहू को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है.
आइजेनकोट पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह नेतन्याहू के साथ किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होंगे. उनका कहना है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के समय देश के बड़े पदों पर मौजूद रहे लोगों को सार्वजनिक जीवन से हट जाना चाहिए.
नेतन्याहू ने की राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की अपील
राष्ट्रपति के फैसले के बाद नेतन्याहू ने भी शनिवार शाम एक वीडियो संदेश जारी किया. इसमें उन्होंने आइजेनकोट के चेंज ब्लॉक से राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने की अपील की. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐसी सरकार में उनके पुराने गठबंधन के सभी सहयोगियों को शामिल करना होगा. इनमें कट्टर राष्ट्रवादी और धार्मिक यहूदी पार्टियां भी हैं.
इस प्रस्ताव को लेकर आइजेनकोट के गुट में सहमति बनना मुश्किल माना जा रहा है. अगर चेंज ब्लॉक नेतन्याहू के सहयोगियों को सरकार में शामिल करने पर राजी हो जाता है तो आइजेनकोट को अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे उन्हें अपने ही गठबंधन के भीतर हो रहे विरोध से राहत मिल सकती है.
अरब पार्टियों को लेकर नेतन्याहू ने दी चेतावनी
नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता सरकार में प्रधानमंत्री पद को लेकर किसी तरह के रोटेशन का प्रस्ताव नहीं दिया है. हालांकि, इजरायल के KAN न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एकता सरकार पर बातचीत होने की स्थिति में वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो सकते हैं.
अपने वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता आतंकवाद का समर्थन करने वाली पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते हैं.
नेतन्याहू ने दावा किया कि हमास के समर्थकों के सहारे बनने वाली सरकार उसके खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ पाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार के रहते इजरायल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. इसके साथ ही उन्होंने नेशनल कैंप की सभी पार्टियों को साथ लेकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की अपील की. नेशनल कैंप नाम का इस्तेमाल नेतन्याहू और उनके सहयोगी अपने दक्षिणपंथी गठबंधन के लिए करते हैं.
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