Mahadev Shivling Puja: सावन का महीना चल रहा है और हिंदू धर्म में इसका बेहद महत्व होता है. यह महीना भगवान शिव रो समर्पित होता है और इस दौरान शिव की पूजा- अर्चान करने से उनका आशीर्वाद मिलता है. जैसे सोमवार की दिन भगवान शिव को समर्पित होता है तो सवान में इस दिन कई लोग मंदिर जाकर शिवलिंग की पूजा करते हैं. शिवलिंग में जल, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाया जाता है. लेकिन कभी आपने सोचा है कि शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों होता है और इसकी स्थापना की वजह क्या है. तो चलिए आपको बताते हैं-
शिवलिंग को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है. इसमें सबसे नीचे के हिस्से को जमीन से जोड़ा गया है और ये ब्रह्मा जी को दर्शाता है. इसका मतलब ये है कि सृष्टि के रचनाकार से ही शिवलिंग की शुरुआत होती है.
शिवलिंग के बीच का भाग समतल होता है और सबसे ऊपर का भाग अंडाकार होता है और इसकी पूजा की जाती है. बीच का हिस्सा सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इसका मतलब सृष्टि की रक्षा करना है. वहीं, ऊपरी भाग भगवान शिव को दर्शाता है यानी अनंतता और उन्नति.
शिवलिंग को दो प्रकारों में भांटा गया है. पहला उल्का और दूसरा पारद शिवलिंग. पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग के 6 प्रकार हैं. देवलिंग, असुर लिंग, स्वयंभू शिवलिंग, मनुष्य शिवलिंग और बर्फ शिवलिंग.
मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा करने से पूरे ब्रह्मांड की पूजा हो जाती है. क्योंकि इसमें त्रिदेवों का वास होता है और शिवजी ही पूरे जगत के मूल है. शिव का अर्थ होता है 'परम कल्याणकारी' और लिंग का मतलब होता है 'सृजन'.
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