ओडिशा के विधायकों और मंत्रियों की सैलरी बढ़ी, 211% की हुई बढ़ोतरी, आपके राज्य में कितना मिलता है वेतन?

ओडिशा विधानसभा ने हाल ही में चार अलग-अलग विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और पूर्व विधायकों के वेतन और भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की है.

Salaries of Odisha MLAs and ministers increased
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ओडिशा विधानसभा ने हाल ही में चार अलग-अलग विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और पूर्व विधायकों के वेतन और भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी के बाद ओडिशा के विधायक अब देश के सबसे अधिक वेतन पाने वाले विधायकों की सूची में शीर्ष पर आ गए हैं.

नए वेतन-भत्तों का विस्तार

नई व्यवस्था के तहत अब एक सामान्य विधायक का मासिक वेतन-भत्ता 1.11 लाख से बढ़कर 3.45 लाख रुपये हो गया है. यह 211 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. इसके साथ ही अन्य पदों के वेतन में भी भारी बढ़ोतरी हुई है:

  • मुख्यमंत्री का वेतन 98,000 से बढ़कर 3.74 लाख रुपये प्रति माह
  • मंत्रियों का वेतन 97,000 से बढ़कर 3.58 लाख रुपये प्रति माह
  • विधानसभा स्पीकर का वेतन 97,500 से बढ़कर 3.68 लाख रुपये प्रति माह

यह बढ़ोतरी जून 2024 से रेट्रोस्पेक्टिव (पूर्व प्रभाव से) लागू की जाएगी, जिससे सभी को पिछले महीनों का एरियर भी मिलेगा.

पूर्व और मृतक विधायकों के लिए नई सुविधाएं

पूर्व विधायकों की पेंशन को 30,000 रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. इसके अलावा किसी भी वर्तमान विधायक की मृत्यु पर उसके परिवार को 25 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि देने का प्रावधान जोड़ा गया है.

इसके अलावा, अब हर पांच साल में वेतन-भत्तों की स्वतः समीक्षा की जाएगी. अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए अध्यादेश के जरिए भी बढ़ोतरी की जा सकती है.

ओडिशा के विधायक अब सबसे ज्यादा वेतन वाले

इस नई वृद्धि के बाद ओडिशा के विधायक अब अन्य प्रमुख राज्यों से आगे निकल गए हैं. तुलना इस प्रकार है:

इसके अलावा, दिल्ली में विधायकों को 90,000 रुपये और केरल में केवल 70,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है.

बढ़ोतरी का राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य

राज्य के संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने इस वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि 2018 के बाद से विधायकों का वेतन नहीं बढ़ा था, जबकि महंगाई लगातार बढ़ी. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में ओडिशा पिछड़ गया था.

इस वेतन वृद्धि की मांग सभी प्रमुख दलों से आई थी. बीजेडी की सात बार की विधायक प्रमिला मलिक ने विशेष रूप से ढाई गुना वेतन वृद्धि की मांग की थी. कांग्रेस और भाजपा के सदस्य भी दूसरे राज्यों के आंकड़ों का हवाला देते हुए इसे समर्थन देने लगे.

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी 2022 में विपक्ष में रहते हुए वेतन वृद्धि की वकालत की थी. नतीजतन, चारों विधेयक बिना किसी विरोध के मिनटों में पारित कर दिए गए.

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