नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 से 24 मई तक नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को इस यात्रा की जानकारी दी, जिसे भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है.
जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप और भारत के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी और आतंकवाद से निपटने जैसे साझा मुद्दों पर सहयोग लगातार गहराता जा रहा है.
यात्रा के प्रमुख उद्देश्य:
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यात्रा के दौरान जयशंकर तीनों देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. चर्चाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल रह सकते हैं:
जर्मनी: नए चांसलर से पहली मुलाकात
जयशंकर की यात्रा का विशेष महत्व जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से होने वाली उनकी पहली आधिकारिक बैठक को लेकर है. चांसलर मर्ज़ ने इसी महीने पदभार ग्रहण किया है, और भारत ने उन्हें बधाई देते हुए रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की इच्छा जाहिर की थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मर्ज़ को X (पूर्व ट्विटर) पर बधाई देते हुए लिखा था, "भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और ऊंचाई पर ले जाने के लिए मैं तत्पर हूं."
जर्मनी भारत का प्रमुख व्यापारिक और तकनीकी भागीदार है, और दोनों देश ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट में सहयोग कर रहे हैं.
डेनमार्क: 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप'
डेनमार्क के साथ भारत का सहयोग "ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप" पर केंद्रित है, जो कि सतत विकास, हरित ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को रेखांकित करता है.
दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्य, क्षेत्रीय स्थिरता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी उन्हें एक विश्वसनीय भागीदार बनाते हैं. विदेश मंत्री की यह यात्रा ग्रीन एनर्जी सेक्टर में नए समझौते और साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.
नीदरलैंड: तकनीक, जल और कृषि में साझेदारी
नीदरलैंड के साथ भारत के संबंधों में जल प्रबंधन, स्मार्ट कृषि और शहरी विकास अहम स्तंभ हैं. इस यात्रा में डिजिटल नवाचार, साइबर सुरक्षा और यूरोपीय यूनियन के साथ बहुपक्षीय सहयोग के रास्ते खुलने की संभावना है.
नीदरलैंड, जो कि भारत में एक बड़ा निवेशक और तकनीकी भागीदार है, पहले भी भारतीय स्टार्टअप्स और स्वच्छ तकनीक परियोजनाओं में रुचि दिखा चुका है.
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इन तीनों यूरोपीय देशों ने भारत के साथ अपनी संवेदना और समर्थन प्रकट किया था.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इसे "भयानक" बताया और आतंकवाद की कड़ी निंदा की. जर्मनी के पूर्व चांसलर ओलाफ शोल्ज़ और नीदरलैंड के राष्ट्रपति डिक स्कूफ ने भी भारत के साथ खड़े होने की बात कही.
इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की यह यात्रा आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त वैश्विक प्रयासों को गति देने का अवसर भी बन सकती है.
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