विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 33वें आसियान रीजनल फोरम (ARF) में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के लिए किसी तरह की नरमी नहीं होनी चाहिए और आतंकियों तक पहुंचने वाले पैसों के स्रोत भी पूरी तरह बंद किए जाने चाहिए.
आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई की अपील
बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए.
Participated in the 21st East Asia Summit (EAS) in Manila today,making the points below in my statement:
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 23, 2026
✅ The global order is uncertain and volatile where interdependence and common interests co-exist with competitiveness and rivalries.
✅ There are structural changes being… pic.twitter.com/QZ1wovs8QP
उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को उनके किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए. इसके साथ ही उन आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिनके जरिए आतंकवाद को पैसा मिलता है.
टेरर फंडिंग रोकने पर दिया जोर
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए सिर्फ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई काफी नहीं है. उन लोगों और संगठनों पर भी सख्ती जरूरी है, जो उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाते हैं.
उन्होंने कहा कि टेरर फंडिंग रोकना वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए.
समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भी बोले
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया.
उन्होंने कहा कि समुद्री जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते. दुनिया के सभी देशों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट सुरक्षित रहें और व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका बताई
जयशंकर ने कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहा है.
उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना समुद्री डकैती, तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के साथ-साथ समुद्री व्यापार की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रही है.
भारत के राहत कार्यों का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में मदद की है.
उन्होंने बताया कि भारत ने जरूरत पड़ने पर फील्ड अस्पताल, राहत सामग्री और बचाव दल भी भेजे हैं.
दक्षिण चीन सागर पर भी रखा भारत का पक्ष
विदेश मंत्री ने दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा कि भारत ऐसे आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) का समर्थन करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के नियमों के अनुसार हो.
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