टेस्ट में फेल हुई रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल, लॉन्च होने के बाद सीधे जमीन पर आ गिरी, देखे VIDEO

रूस के एक नवीनतम हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण के दौरान गंभीर दुर्घटना सामने आई है. परीक्षण के तुरंत बाद ही मिसाइल हवा में नियंत्रण खो बैठी और कुछ ही क्षणों में जमीन पर गिरकर तेज धमाके के साथ फट गई.

Russias hypersonic missile fails in test fell directly on the ground
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रूस के एक नवीनतम हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण के दौरान गंभीर दुर्घटना सामने आई है. परीक्षण के तुरंत बाद ही मिसाइल हवा में नियंत्रण खो बैठी और कुछ ही क्षणों में जमीन पर गिरकर तेज धमाके के साथ फट गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें मिसाइल के असफल प्रक्षेपण और आग के विशाल गोले को साफ देखा जा सकता है.

रूसी सैन्य सूत्रों के अनुसार परीक्षण किए जा रहे हथियार में UR-100N अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल शामिल थी, जिसे अत्याधुनिक अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल के साथ जोड़ा गया था. प्रारंभिक रिपोर्टों में बताया गया कि मिसाइल ने लॉन्च के बाद एक निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन अचानक उसका इंजन ठीक से काम नहीं कर पाया. इसके कारण मिसाइल अपेक्षित दिशा में ऊपर जाने के बजाय उल्टी घूमकर नीचे की ओर मुड़ गई और साइट पर ही आकर गिर गई.

अचानक हुए विस्फोट ने लॉन्च परिसर को आग की लपटों से भर दिया और साइट पर मौजूद कर्मियों को तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने पड़े.

अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल

टेस्ट किए जा रहे हथियार की विशेषता उसका अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल था, जिसे रूस अपनी सबसे उन्नत स्ट्रेटेजिक क्षमताओं में से एक मानता है. अवांगार्ड की विशेषता यह है कि यह ध्वनि की गति से 27 गुना अधिक यानी लगभग 33,000 किमी/घंटा तक की रफ्तार से उड़ान भर सकता है.

इसके साथ ही यह ग्लाइड व्हीकल ऊंचाई और दिशा में लगातार बदलाव करते हुए दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणालियों को भ्रमित कर सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह की हाइपरसोनिक प्रणाली परमाणु पेलोड ले जाने और गहरे अंदर स्थित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होती है. रूस इसे अपनी ‘डीटरेंस रणनीति’ का मुख्य हिस्सा मानता है.

यास्नी लॉन्च साइट: रूस का प्रमुख मिसाइल अड्डा

स्थानीय और रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार परीक्षण ओरेनबर्ग ओब्लास्ट के यास्नी शहर के पास स्थित प्रमुख मिसाइल लॉन्च केंद्र में किया गया था. यह वही क्षेत्र है जहाँ रूस की स्ट्रैटेजिक रॉकेट फोर्सेज की 13वीं ऑरेनबर्ग रेड बैनर रॉकेट डिवीजन तैनात है.

यह साइट उन गिने-चुने ठिकानों में से एक है जहाँ से रूस अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण या तैनाती करता है, जिनमें परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी शामिल होती है. फेल लॉन्च के दौरान स्थानीय लोगों ने आसमान में तेज चमक, विस्फोट की आवाज और फिर बड़े आकार के नारंगी रंग के बादल को उठते हुए देखा.

विस्फोट के कारण और तकनीकी खराबी

मिसाइल विशेषज्ञों द्वारा किए गए प्राथमिक विश्लेषण से संकेत मिलता है कि उड़ान के शुरुआती चरण में ही मिसाइल के अंदर एक बड़ा धमाका हुआ था. इससे उसका स्थिरता संतुलन (स्टेबिलिटी) पूरी तरह बिगड़ गया और वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई.

विश्लेषकों ने वीडियो की फ्रेम-दर-फ्रेम जांच के आधार पर कहा कि विस्फोट के बाद जो बड़ा नारंगी बादल बना, वह दिखाता है कि मिसाइल में लिक्विड फ्यूल प्रोपेलेंट का इस्तेमाल किया गया था. तरल ईंधन वाली मिसाइलों में लीक या असंतुलित दहन (combustion instability) जैसी समस्याएँ गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं.

यह घटना रूस की मिसाइल तकनीक और विशेष रूप से हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इस समय रूस अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है.

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