चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक तस्वीर को हिला कर रख दिया है. कई बार बातचीत की कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार नतीजा सिर्फ निराशा ही निकला. अब एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूस ने संकेत दिए हैं कि वह तुर्की के इस्तांबुल में यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है. यह कदम अगर सच में उठाया गया, तो यह न सिर्फ इस लंबे युद्ध में एक नया अध्याय खोलेगा बल्कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दुआन के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी.
रूसी विदेश मंत्रालय के अधिकारी एलेक्सी पोलिशचुक ने कहा कि तुर्की लगातार दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को पुनः शुरू करने की कोशिश कर रहा है. पोलिशचुक के शब्दों में, “रूसी टीम तैयार है, अब फैसला यूक्रेन के हाथ में है.” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है. अगर रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता की नई शुरुआत होती है, तो यह 23 जुलाई के बाद पहली बार होगा जब दोनों पक्ष किसी औपचारिक मंच पर आमने-सामने बैठेंगे. तुर्की पहले भी इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर चुका है, और इस बार भी उसकी कोशिशें अहम मानी जा रही हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वार्ता की राह खुलती है, तो इसका श्रेय एर्दुआन की सक्रिय कूटनीति को जाएगा.
यूक्रेन का रुख अब भी सख्त
हालांकि रूस की यह पहल सामने आई है, लेकिन यूक्रेन का रवैया अभी भी स्पष्ट और सख्त बना हुआ है. कीव ने रूस के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि शांति प्रक्रिया में रुकावट की जिम्मेदारी यूक्रेन की है. पिछली बार, यानी 23 जुलाई को हुई 40 मिनट की संक्षिप्त बैठक में यूक्रेन ने प्रस्ताव रखा था कि राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने मिलकर समाधान खोजें.
इसके जवाब में क्रेमलिन ने कहा था कि पुतिन बैठक के लिए तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि मुलाकात सिर्फ मास्को में ही होगी इस शर्त को यूक्रेन ने अस्वीकार कर दिया था. इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की खाई अब भी गहरी है. यूक्रेन अब किसी भी बातचीत को तभी संभव मानता है जब रूस पहले कब्जाए गए इलाकों से अपनी सेना हटाने पर राजी हो.
युद्ध की थकान और नए समीकरण
युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और दोनों देशों को भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान झेलना पड़ा है. रूस ने कई क्षेत्रों में अपनी मजबूत स्थिति बना ली है, जबकि यूक्रेन पश्चिमी देशों की सैन्य और आर्थिक मदद के बावजूद लगातार संघर्षरत है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में रूस एक बेहतर स्थिति में है. यूक्रेन को किसी भी संभावित युद्धविराम या शांति समझौते में अपने कुछ इलाकों को खोने का खतरा झेलना पड़ सकता है. यही वजह है कि कीव किसी भी समझौते से पहले बेहद सतर्क है.
क्या इस्तांबुल बनेगा शांति का केंद्र?
तुर्की के लिए यह सिर्फ एक राजनयिक प्रयास नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को फिर से स्थापित करने का मौका भी है. अगर इस्तांबुल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि एक बार फिर आमने-सामने बैठते हैं, तो यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा.हालांकि यह भी सच है कि अब तक हुई तमाम वार्ताओं की तरह यह पहल भी तभी सफल होगी जब दोनों पक्ष अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर वास्तविक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे.
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