रूस और यूक्रेन के बीच चला आ रहा युद्ध अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. अंतरराष्ट्रीय मंचों से लेकर उच्चस्तरीय बैठकों तक, इस संघर्ष को खत्म करने के लिए कई कोशिशें की गईं, मगर अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया. इसी बीच रूस ने एक बड़ा बयान देते हुए पश्चिमी देशों की मंशा और क्षमता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्रेमलिन की ओर से शुक्रवार, 5 सितंबर को जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोप जैसे ताकतवर देश भी यूक्रेन को सुरक्षा की कोई ठोस गारंटी नहीं दे सकते. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूसी मीडिया से बातचीत में कहा, "क्या विदेशी सेनाएं खासकर यूरोपीय और अमेरिकी यूक्रेन को सुरक्षा दे सकती हैं? बिल्कुल नहीं. ऐसा संभव नहीं है." पेस्कोव का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को सैन्य सहायता और कूटनीतिक समर्थन देने की बात कर रहे हैं. रूस का तर्क है कि यह पूरा संघर्ष नाटो के विस्तार और पश्चिमी हस्तक्षेप की वजह से पैदा हुआ है, जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.
ट्रंप की कोशिशें भी रहीं नाकाम
इस युद्ध को रोकने की दिशा में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रयास किए थे. उन्होंने पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात कर मसला सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वार्ता किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई. इस दौरान यूक्रेन को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं और देश की बुनियादी संरचनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. हालांकि यूक्रेन भी चुप नहीं बैठा—उसने रूस पर कई बार मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं, जिससे जवाबी कार्रवाई की लपटें और तेज हो गई हैं.
मैक्रों का दावा 26 देश तैयार हैं यूक्रेन की मदद को
दूसरी ओर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक अहम बयान देते हुए कहा है कि अब तक 26 देश यूक्रेन की सुरक्षा के लिए आगे आ चुके हैं. फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने कहा, "यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन यूक्रेन को मिल रहा है. यह सैन्य तैनाती किसी भी संभावित आक्रमण को रोकने के उद्देश्य से की जाएगी." इस बयान से साफ है कि पश्चिमी देश अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि जमीन पर सैन्य उपस्थिति के ज़रिए रूस को कड़ा संदेश देने की तैयारी में हैं.
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