PM Modi 75th Birthday: यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस यात्रा की शुरुआत है, जिसने भारत की राजनीति को एक नया मोड़ दिया. गुजरात के वडनगर कस्बे में एक साधारण परिवार में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने जिस तरह से खुद को गढ़ा, वह भारत के करोड़ों युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है.
कभी रेलवे स्टेशन पर पिता के साथ चाय बेचने वाला ये बालक, आज विश्व के सबसे शक्तिशाली नेताओं में गिना जाता है. मोदी की कहानी संघर्ष, सेवा और संकल्प की वो मिसाल है, जहां कोई राजनीतिक विरासत नहीं थी, लेकिन जज़्बा और निष्ठा विरासत से कहीं बड़ा साबित हुआ.
संघ की शाखा से शुरू हुआ सफर
बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे मोदी ने 1971 में घर छोड़ दिया और पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में राष्ट्रसेवा में जुट गए. उनके अंदर की आग और अनुशासन ने उन्हें संघ के भीतर एक खास पहचान दिलाई. यही संघ से मिली ट्रेनिंग ने बाद में उन्हें भारतीय जनता पार्टी में एक कुशल रणनीतिकार के रूप में उभारा.
1987 में बीजेपी की राह पकड़ी, संगठन को दी नई ताकत
जब 1987 में नरेंद्र मोदी ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा, उस वक्त पार्टी अपने संघर्ष के दौर से गुजर रही थी. लेकिन जल्द ही उनकी संगठनात्मक क्षमता सामने आने लगी. अहमदाबाद निकाय चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत ने सबका ध्यान खींचा और मोदी ने अपनी जमीनी पकड़ और राजनीतिक दृष्टि से संगठन को मजबूत करना शुरू किया.
2001: जब पहली बार संभाली मुख्यमंत्री की कमान
7 अक्टूबर 2001, यह वह दिन था जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. न कोई चुनावी अनुभव, न प्रशासनिक पृष्ठभूमि, लेकिन एक दृढ़ निश्चयी मन. उस समय गुजरात मुश्किल दौर से गुजर रहा था, लेकिन मोदी ने अगले 13 वर्षों तक राज्य को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया.
2014: राष्ट्रीय राजनीति में 'मोदी युग' की शुरुआत
जब बीजेपी ने 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाया, तब पूरे देश में एक नई उम्मीद जागी. "सबका साथ, सबका विकास" के नारे के साथ नरेंद्र मोदी ने न केवल पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की, बल्कि भारतीय राजनीति में "मोदी युग" की शुरुआत कर दी.
26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इसके बाद 2019 में दोबारा वापसी और फिर 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले वो नेहरू के बाद पहले नेता बने.
राजनीति से परे एक वैश्विक पहचान
आज नरेंद्र मोदी सिर्फ भारत के नेता नहीं, बल्कि दुनिया के प्रभावशाली नेताओं की सूची में गिने जाते हैं. उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी आवाज बुलंद की है, चाहे वो G20 की अध्यक्षता हो या संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका.
जो लगातार जीत दिलाता रहा
मोदी का करिश्मा सिर्फ आम चुनावों तक सीमित नहीं रहा. राज्य विधानसभाओं, नगर निकायों और पंचायत चुनावों में भी उनके नाम की गूंज सुनाई देती है. उनकी अगुवाई में बीजेपी ने ब्राह्मण-बनिया पार्टी की छवि को तोड़ा और इसे 'सर्वसमाज की पार्टी' में बदल दिया.
75 वर्ष का सफर, 75 वर्ष की प्रेरणा
आज जब नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो रहे हैं, तो ये सिर्फ एक जन्मदिन नहीं है, यह उस यात्रा का उत्सव है, जिसमें एक साधारण व्यक्ति ने असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं. वे लाखों युवाओं के लिए ये संदेश छोड़ते हैं कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो कोई भी ऊंचाई दूर नहीं.
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