Independence Day Security: स्वतंत्रता दिवस से पहले चंडीगढ़ पुलिस ने एक बड़ी संभावित आपराधिक साजिश को नाकाम करने का दावा किया है. ऑपरेशन सेल ने हरियाणा के तीन युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पाकिस्तान से कथित तौर पर आए अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक, आरोपितों के पास से एक जिगाना पिस्टल, दो पीएफ-3 पिस्टल, दो मैगजीन और 19 जिंदा कारतूस मिले हैं. शुरुआती जांच में तीनों के कुख्यात दीपक नंदल गैंग से जुड़े होने की बात सामने आई है.
पुलिस को आशंका है कि इन हथियारों का इस्तेमाल गुरुग्राम में रंगदारी वसूलने और फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था. आरोपितों ने कथित तौर पर एक टारगेट की रेकी भी की थी. ऐसे में स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम कामयाबी माना जा रहा है.
बेहद कम उम्र के हैं तीनों आरोपी
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों की उम्र करीब 18 से 19 साल के बीच बताई जा रही है. अजय की उम्र लगभग 19 वर्ष है, जबकि रोहित और देव करीब 18 साल के हैं. पुलिस के अनुसार, इन युवकों का कोई बड़ा आपराधिक प्रोफाइल सामने नहीं आया था और वे सामान्य नौकरियां कर रहे थे. अजय जींद में मारुति कंपनी में हेल्पर के तौर पर काम करता था. आरोप है कि इसी दौरान वह गैंग के संपर्क में आया और बाद में उसने रोहित और देव को भी गैंग के नेटवर्क से जोड़ दिया. रोहित जींद में इलेक्ट्रिक की दुकान पर काम करता था, जबकि देव भी एक दुकान पर हेल्पर के रूप में काम कर रहा था. पुलिस का दावा है कि गैंग ने इन युवकों को बड़ी रकम कमाने का लालच दिया और इसी लालच के जरिए उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल किया गया.
गुरुग्राम में टारगेट की कराई गई थी रेकी
जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों युवकों को कथित तौर पर गुरुग्राम भेजा गया था. वहां उनसे एक संभावित टारगेट की रेकी कराई गई. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर वह टारगेट कौन था और उसके खिलाफ किस तरह की वारदात को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी. पुलिस को शक है कि रंगदारी की मांग पूरी नहीं होने पर फायरिंग की योजना बनाई गई थी. हालांकि, इस साजिश में गैंग के कितने लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम देने के लिए कौन-कौन से निर्देश दिए गए थे, इसका पता पूछताछ और आगे की जांच के बाद ही चल सकेगा.
चेकिंग के दौरान पुलिस के हाथ लगे हथियार
15 अगस्त को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को पहले ही मजबूत किया गया है. इसी दौरान ऑपरेशन सेल की टीम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी. चेकिंग के दौरान पुलिस ने अजय, रोहित और देव को पकड़ा. तलाशी लेने पर उनके कब्जे से हथियार और कारतूस बरामद हुए. बरामद हथियारों की संख्या और उनकी प्रकृति ने पुलिस की जांच को गंभीर दिशा दी. पूछताछ में कथित तौर पर दीपक नंदल गैंग से उनके संपर्क की जानकारी सामने आई. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियार उन्हें सीधे गैंग के किसी सदस्य ने उपलब्ध कराए थे या किसी दूसरे माध्यम से उन तक पहुंचाए गए.
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने का दावा
जांच के दौरान पुलिस ने हथियारों की सप्लाई को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का भी दावा किया है. पुलिस के मुताबिक, अमृतसर के गांव कक्कड़ निवासी 32 वर्षीय निशान सिंह पाकिस्तान में बैठे कथित हथियार सप्लायर के संपर्क में था. पुलिस का कहना है कि निशान सिंह डेयरी का काम करता है और इसी की आड़ में सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जाने वाले हथियारों को रिसीव करता था. इसके बाद कथित तौर पर इन हथियारों को गैंग के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाया जाता था. अब पुलिस निशान सिंह की भूमिका की जांच करने के साथ-साथ पाकिस्तान में बैठे कथित हथियार सप्लायरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इससे पहले कितनी हथियारों की खेप भारत पहुंचाई जा चुकी है और उनका इस्तेमाल किन वारदातों में हुआ.
गैंग के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश
तीनों युवकों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब केवल बरामद हथियारों तक सीमित नहीं है. ऑपरेशन सेल गैंग के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि युवकों को गैंग में किसने शामिल कराया, हथियार किसने उपलब्ध कराए और गुरुग्राम में कथित टारगेट की रेकी के बाद अगला निर्देश किस स्तर से मिला. जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक वारदात में हुआ है या नहीं. इसके लिए पुलिस हथियारों और कारतूसों की फॉरेंसिक जांच कराने के साथ पुराने मामलों से भी उनका लिंक तलाश सकती है.
स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी कार्रवाई
चंडीगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब 15 अगस्त को लेकर शहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है. पुलिस का दावा है कि समय रहते तीनों युवकों को गिरफ्तार किए जाने से गुरुग्राम में संभावित रंगदारी और फायरिंग की वारदात को टालने में मदद मिली.
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