Ravneet Singh Bittu Resignation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया. राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज थीं और अब राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक घोषणा के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया है. बिट्टू का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब भारतीय जनता पार्टी ने हालिया राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार भी नहीं बनाया था.
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया इस्तीफा
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत लिया गया है, जिसके तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति मंत्रियों की नियुक्ति और पदमुक्ति से जुड़े निर्णय लेते हैं. इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.
राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था. इसके बाद से ही यह सवाल उठ रहे थे कि वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में कितने समय तक बने रहेंगे. भारतीय जनता पार्टी ने 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था. इसके बावजूद वह कुछ समय तक मंत्री पद पर बने रहे, लेकिन अब उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है.
कांग्रेस छोड़कर BJP में हुए थे शामिल
रवनीत सिंह बिट्टू ने 24 मार्च 2024 को भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था. इससे पहले वह लंबे समय तक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और पार्टी की ओर से लोकसभा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री बनाया गया था.
पंजाब की राजनीति का बड़ा चेहरा
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं. वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 2009 में आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना सीट से सांसद चुने गए. उनकी पहचान पंजाब के प्रभावशाली नेताओं में रही है.
कांग्रेस में भी निभाई थीं अहम जिम्मेदारियां
कांग्रेस में रहते हुए रवनीत सिंह बिट्टू को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. वर्ष 2021 में जब कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्त थे, तब कुछ समय के लिए बिट्टू को लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया गया था. इसके अलावा उन्हें लोकसभा में पार्टी का सचेतक (Whip) भी नियुक्त किया गया था.
सिंघू बॉर्डर पर हुआ था हमला
जनवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान आयोजित 'जन संसद' कार्यक्रम में सिंघू बॉर्डर पर रवनीत सिंह बिट्टू पर हमला भी हुआ था. उस घटना के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में आए थे. राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई.
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