MEA On Pakistan Claims: भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आई है. इस बार विवाद की वजह बनी चिनाब नदी में आई बाढ़, जिसे लेकर पाकिस्तान ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए. हालांकि भारत ने इन आरोपों को तथ्यों के आधार पर सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चिनाब में जलस्तर बढ़ने की असली वजह जम्मू क्षेत्र में हुई भारी मानसूनी बारिश थी. विदेश मंत्रालय ने न सिर्फ पाकिस्तान के दावों को बेबुनियाद बताया, बल्कि चीन के अवैध कब्जे, सिंधु जल समझौते, भारत-अमेरिका व्यापार, अजीत डोभाल की सऊदी यात्रा और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार जैसे कई अहम मुद्दों पर भी देश का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया.
चिनाब में बाढ़ पर पाकिस्तान के दावों को किया खारिज
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते. उन्होंने कहा कि भारत पर चिनाब नदी में बाढ़ लाने का आरोप पूरी तरह निराधार है और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है. भारत ने साफ किया कि नदी का जलस्तर किसी जल प्रबंधन या बांध संचालन की वजह से नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारणों से बढ़ा था.
भारी मानसूनी बारिश बनी बाढ़ की असली वजह
विदेश मंत्रालय के अनुसार 20 से 23 जुलाई 2026 के बीच जम्मू और आसपास के इलाकों में लगातार भारी बारिश हुई थी. इसी कारण चिनाब नदी में पानी का स्तर बढ़ गया. भारत ने यह भी बताया कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन ने 22 जुलाई को जारी अपनी चेतावनी में स्वयं स्वीकार किया था कि ऊपरी क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण मराला हेडवर्क्स में जलस्तर बढ़ा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि बारिश कम होने के साथ पानी का स्तर सामान्य हो जाएगा.
भारत ने कहा- खतरे के स्तर तक नहीं पहुंचा था पानी
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चिनाब नदी का जल प्रवाह खतरे के स्तर से ऊपर नहीं था, इसलिए किसी विशेष बाढ़ चेतावनी की आवश्यकता नहीं थी. इसके बावजूद भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि वह राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान के साथ आवश्यक जल संबंधी सूचनाएं साझा करता रहेगा, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी न बने.
चीन के अवैध कब्जे पर दोहराया पुराना रुख
प्रेस वार्ता के दौरान चीन से जुड़े सवालों पर भी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया. रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता, लेकिन चीन ने 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है. उन्होंने कहा कि भारत इन क्षेत्रों पर अपना वैध और कानूनी दावा रखता है तथा वहां चीन द्वारा किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य या परियोजना का लगातार विरोध करता रहेगा.
सिंधु जल समझौते पर क्या बोला भारत?
आसियान मंच पर पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल समझौते का मुद्दा उठाने पर भारत ने एक बार फिर अपना रुख दोहराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौता स्थगित ही रहेगा. इस मुद्दे पर भारत की नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है.
अमेरिकी टैरिफ पर भारत का जवाब
अमेरिका द्वारा भारत पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने के सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने अमेरिकी घोषणा पर ध्यान दिया है. उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई अमेरिकी ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत की गई है और भारत पहले ही इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है.
अजीत डोभाल की सऊदी यात्रा पर क्या कहा?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की हालिया रियाद यात्रा को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने रणनीतिक साझेदार देशों के साथ नियमित संवाद बनाए रखता है. प्रवक्ता के अनुसार इस यात्रा के दौरान भारत और सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, रणनीतिक सहयोग और साझा हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे भी मजबूत किया जाएगा.
सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार की हो रही निगरानी
भारतीय छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा कथित दुष्प्रचार फैलाए जाने के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. मंत्रालय के मुताबिक किसी भी तरह की भ्रामक सूचना या दुष्प्रचार की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी.
'गोल्डन लियो' जहाज हादसे पर जताया दुख
विदेश मंत्रालय ने 'गोल्डन लियो' जहाज पर चार भारतीय नागरिकों की मौत पर भी गहरा शोक व्यक्त किया. मंत्रालय के अनुसार यह जहाज 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर रवाना हुआ था. भारत ने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल ही में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय पर भारत का स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रख चुके हैं.
ये भी पढ़ें- केमिकल उत्पादन में भारत बनेगा मजबूत, 8 वर्ग किलोमीटर में बनेंगे 3 बड़े केमिकल पार्क, जानें पूरी जानकारी