Ram Mandir: अयोध्या स्थित राम मंदिर के दानपात्रों से कथित धन गबन के मामले में आखिरकार 20 दिनों बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं.
आठ लोगों को बनाया गया आरोपी
दर्ज प्राथमिकी में मंदिर व्यवस्था और नकदी गणना से जुड़े आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है. इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं. जानकारी के अनुसार, इन सभी से पूछताछ की जा चुकी है और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर जांच भी की गई है. हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है.
जांच में और खुलासों की संभावना
जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ सकते हैं. यही वजह है कि आरोपियों की संख्या बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है. फिलहाल वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और नकदी की आवाजाही की गहन जांच जारी है.
शिकायत से लेकर एफआईआर तक का सफर
दानपात्रों से धन गायब होने की जानकारी सबसे पहले जून की शुरुआत में सामने आई थी. शुरुआती स्तर पर ट्रस्ट ने आंतरिक जांच कर रकम की रिकवरी का प्रयास किया. बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की. इसी क्रम में राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसने मंदिर परिसर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच, कर्मचारियों से पूछताछ और नकदी गणना की प्रक्रिया का परीक्षण किया.
SIT जांच में सामने आए विरोधाभास
विशेष जांच दल ने कई दिनों तक मंदिर परिसर में रहकर करीब 150 कर्मचारियों के बयान दर्ज किए. पूछताछ के दौरान कई लोगों के बयानों में विरोधाभास मिला, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया. जांच टीम ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, कैश काउंटिंग एजेंसी और संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर तथ्यों का मिलान किया. प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे गृह विभाग को सौंपा गया.
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
बताया जा रहा है कि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. इसके बाद ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर रामजन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज किया गया.
किन-किन धाराओं में मामला दर्ज?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र, सामूहिक अपराध और धार्मिक स्थल पर रखी संपत्ति की चोरी जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं. दोष सिद्ध होने पर कुछ धाराओं में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है.
शुरुआती जांच में क्या मिला?
जांच के दौरान कुछ आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई. साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की गई. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गबन की रकम कितनी है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.
अभी जांच जारी, बढ़ सकती है कार्रवाई
फिलहाल पुलिस और एसआईटी दोनों मामले की जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
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