नई दिल्ली: दिल्ली में DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) के 68वें स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया. इस मौके पर, उन्होंने DRDO द्वारा हालिया ऑपरेशन सिंदूर में किए गए योगदान की सराहना की. उन्होंने बताया कि DRDO के स्वदेशी हथियारों और उपकरणों ने ऑपरेशन के दौरान सशस्त्र बलों की मदद की और उन्हें एक नया आत्मविश्वास दिया, जिससे भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया.
ऑपरेशन सिंदूर में DRDO का योगदान
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान DRDO के हथियारों की अहम भूमिका का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि DRDO के उपकरण बिना किसी रुकावट के काम करते रहे, जो कि ऑपरेशन की सफलता में एक महत्वपूर्ण योगदान था. इससे न केवल सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ा, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ. DRDO ने अपने निरंतर नवाचार और कड़ी मेहनत से यह साबित किया कि स्वदेशी रक्षा तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्षम है और किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है.
‘सुदर्शन चक्र’ का महत्व
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर DRDO के अगले महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, ‘सुदर्शन चक्र’, पर भी विश्वास जताया. यह परियोजना भारतीय हवाई सुरक्षा के भविष्य को संवारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, 15 अगस्त 2025 को लाल किले से ‘सुदर्शन चक्र’ बनाने की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण ठिकानों को अगले दशक तक पूरी तरह से हवाई सुरक्षा प्रणाली से लैस करना है. DRDO इस परियोजना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारतीय वायु रक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए पूरी तरह से समर्पित है. उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में एयर डिफेंस कितना अहम हो गया है. मुझे पूरा विश्वास है कि डीआरडीओ पूरी निष्ठा के साथ सुदर्शन चक्र के लक्ष्य को हासिल करेगा.”
DRDO और इसके भविष्य के लक्ष्य
DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस मौके पर संगठन की भविष्यवाणियों और योजनाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 2025 में संगठन की प्रमुख उपलब्धियों और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को प्रमुखता से रखा जाएगा. इसके अलावा, उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSMEs के साथ सहयोग को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि DRDO की टेक्नोलॉजी और उत्पादों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके.
निजी क्षेत्र और शिक्षा जगत के साथ सहयोग
रक्षा मंत्री ने DRDO की ओर से निजी क्षेत्र, शिक्षा जगत, स्टार्टअप्स और MSMEs के साथ बढ़ते सहयोग की सराहना की. उनका मानना है कि यह साझेदारी DRDO की ताकत को और अधिक बढ़ाएगी और भारत को तकनीकी रूप से और सशक्त बनाएगी. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में DRDO और अन्य क्षेत्रों के बीच यह सहयोग भारत को एक नई प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के निर्माण में मदद करेगा.
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