Sir Creek Trishul Exercise: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सीमा विवाद और तनाव अब जम्मू-कश्मीर और नियंत्रण रेखा (एलओसी) से आगे बढ़कर गुजरात के सर क्रीक क्षेत्र तक फैल गया है. हाल के दिनों में भारतीय सशस्त्र बलों ने सर क्रीक और आसपास के इलाके में ‘त्रिशूल’ नामक संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू किया है. इस अभ्यास ने इस क्षेत्र को भारत-पाकिस्तान के सुरक्षा समीकरण में नया केंद्र बना दिया है. भारतीय सेना का त्रिशूल अभ्यास 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक चलेगा.
इस दौरान राजस्थान और गुजरात की सीमा पर बड़ी हवाई और जमीनी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. इन गतिविधियों को देखते हुए भारत ने NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया है, ताकि नागरिक उड़ानों को सुरक्षित रूप से मार्गदर्शित किया जा सके. पाकिस्तान ने भी अपने दक्षिणी और मध्य हिस्सों में उड़ानों पर पाबंदी लगाई है, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि वे भी अपने सैन्य अभ्यास या मिसाइल परीक्षण में व्यस्त हैं.
भारत का कहना है कि यह एक वार्षिक नियमित अभ्यास है, लेकिन विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान को एक रणनीतिक संदेश भी मान रहे हैं. त्रिशूल अभ्यास की टाइमिंग, जगह और पैमाना इस बात का संकेत दे रहे हैं कि भारत अपने पश्चिमी तट और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को गंभीरता से देख रहा है.
सर क्रीक विवाद की पृष्ठभूमि
सर क्रीक एक 96 किलोमीटर लंबा ज्वारीय क्षेत्र है, जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित है. इस इलाके की रणनीतिक और सामरिक अहमियत इसलिए है क्योंकि यहीं से दोनों देशों की समुद्री सीमा (Exclusive Economic Zone-EEZ) निर्धारित होती है, जो अरब सागर में लगभग 370 किलोमीटर तक जाती है.
भारत का दावा है कि सीमा सर क्रीक के बीचों-बीच से गुजरती है, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि पूर्वी किनारा ही सीमा होना चाहिए. यदि पाकिस्तान का दावा मान लिया गया तो उसे पूरे क्षेत्र पर अधिकार मिल जाएगा. यह विवाद 1969 से जारी है और अब तक कई बैठकों और वार्ताओं के बाद भी इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
बढ़ी सैन्य गतिविधियां और चेतावनियां
हाल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान सर क्रीक में कोई भी provocative कदम उठाता है, तो उसका जवाब इतिहास और भूगोल दोनों बदल देने वाला होगा. इसके बाद पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख ने भी सर क्रीक का दौरा किया और वहां के सैन्य ढांचे और चौकियों का निरीक्षण किया. इन गतिविधियों ने भारत को सतर्क कर दिया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा नई चौकियों का निर्माण और सैन्य ढांचे का विस्तार भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए चिंता का विषय है. इसी कारण त्रिशूल अभ्यास में भारी संख्या में नौसैनिक और हवाई बल शामिल हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत मुकाबला किया जा सके.
सर क्रीक की सामरिक अहमियत
सर क्रीक पश्चिमी तट की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र भारत के नौसैनिक और हवाई ठिकानों के करीब स्थित है. पिछले कुछ वर्षों में यहां पाकिस्तान से आई संदिग्ध नावों की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र संभावित घुसपैठ मार्ग बन गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर और एलओसी पर घुसपैठ के रास्ते अब मुश्किल हो गए हैं, इसलिए पाकिस्तान तटीय रास्तों के जरिए नई चालें आज़मा सकता है. ऐसे में त्रिशूल अभ्यास का उद्देश्य केवल युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि संभावित समुद्री और असममित हमलों का जवाब देने की तैयारी भी है.
यह भी पढ़ें- क्या भारत को मिल पाएगा फाइनल का टिकट? ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हेड-टू-हेड रिकॉर्ड देख चौंक जाएंगे आप