लखनऊ में खुला ‘मिनी जामताड़ा’ का राज, अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर 200 करोड़ की ठगी, 7 गिरफ्तार

Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. समिट बिल्डिंग में 119 लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब शहीद पथ के पास स्थित ओमेक्स आर-2 सोसायटी में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ है.

racket busted in Lucknow US citizens swindled out of ₹200 crore via digital arrest 7 arrested
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Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. समिट बिल्डिंग में 119 लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब शहीद पथ के पास स्थित ओमेक्स आर-2 सोसायटी में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ है.

क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर रात कार्रवाई करते हुए सात साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था और उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले करीब आठ महीनों में इस गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है. लखनऊ पुलिस ने बताया कि ओमेक्स आर-2 में चल रहा यह कॉल सेंटर किसी छोटे जामताड़ा की तरह काम कर रहा था.

माइक्रोसॉफ्ट और सरकारी अधिकारी बनकर करते थे ठगी

पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल यादव ने बताया कि आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट कर्मचारी और अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) के अधिकारी के रूप में पेश करते थे. गिरोह पहले अमेरिकी नागरिकों का डाटा जुटाता था. इसके बाद उन्हें फर्जी पॉप-अप मैसेज भेजे जाते थे, जिनमें कंप्यूटर में वायरस आने या बैंक खाते से जुड़ी परेशानी का दावा किया जाता था.

जब पीड़ित दिए गए नंबर पर कॉल करता था तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारी बताकर बात करते थे. इसके बाद उन्हें डराया जाता था कि उनके बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट या सोशल सिक्योरिटी नंबर का गलत इस्तेमाल हुआ है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसके बाद कॉल को दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर किया जाता था, जो खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित पर और दबाव बनाता था.

फर्जी दस्तावेज दिखाकर बनाते थे भरोसा

ठगी करने वाले आरोपी पीड़ितों को विश्वास दिलाने के लिए नकली सरकारी दस्तावेज, फर्जी कोर्ट आदेश और ई-मेल भेजते थे. इसके बाद टीम व्यूअर और अल्ट्रा व्यूअर जैसे सॉफ्टवेयर के जरिए लोगों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते थे. इसके जरिए वे बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे. पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी सीधे बैंक खाते में पैसा नहीं मंगाते थे.

वे लोगों से अमेजन और वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे. बड़ी रकम के मामलों में अमेरिका में मौजूद अपने साथियों के जरिए नकदी और सोने की डिलीवरी भी लेते थे. बाद में पैसे को क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के माध्यम से दूसरी जगह भेज दिया जाता था.

समिट बिल्डिंग वाले गिरोह जैसा था तरीका

एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि ओमेक्स में पकड़ा गया कॉल सेंटर समिट बिल्डिंग में पकड़े गए गिरोह की तरह ही काम कर रहा था. इस गिरोह में भी अलग-अलग राज्यों से युवाओं को नौकरी के नाम पर बुलाया गया था. अंग्रेजी बोलने वाले और कॉल सेंटर का अनुभव रखने वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाती थी.

गिरोह कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी करता था, लेकिन उन्हें कोई आधिकारिक नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता था. पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है.

पुलिस ने बरामद किए लैपटॉप और मोबाइल

गिरफ्तार आरोपियों में अहमदाबाद के पुनीत कुमार वर्मा और दीपेन चंद्र कांत पटेल के अलावा कोलकाता के मोहम्मद सोहेल, मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद रियाज और सज्जाद हुसैन शामिल हैं.

पुलिस ने इनके पास से आठ लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, नौ हेडफोन, चार वाई-फाई राउटर और अन्य सामान बरामद किया है. जांच के दौरान पुलिस को विदेशी नागरिकों का डाटा, ठगी करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बातचीत की स्क्रिप्ट, फर्जी ई-मेल और दस्तावेज भी मिले हैं. पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और कॉल रिकॉर्ड सहित सभी डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है.

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