हमले के बाद अमेरिका पहुंचे कतर के पीएम, क्या इजराइली पीएम को समझाएंगे ट्रंप?

न्यूयॉर्क में शुक्रवार को कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक अहम बैठक हुई. यह मुलाकात रात्रि भोज के दौरान हुई, जिसे व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है.

Qatar PM America Visit after israeli attacked
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न्यूयॉर्क में शुक्रवार को कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक अहम बैठक हुई. यह मुलाकात रात्रि भोज के दौरान हुई, जिसे व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है, हालांकि बैठक की विस्तारपूर्वक जानकारी नहीं दी गई. इस बातचीत का समय काफी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले इजराइल ने कतर की राजधानी दोहा पर हवाई हमले किए थे, जिनमें हमास के नेताओं को निशाना बनाया गया था.


9 सितंबर के इस हमले के तुरंत बाद, ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की और अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कतर को आश्वस्त किया कि इस तरह के हमले दोबारा नहीं होंगे, हालांकि नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से इस बात की गारंटी देने से इनकार किया. मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य बेस, अल उदीद, कतर में स्थित है, जहां लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं.

अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कतर पीएम की बैठक

न्यूयॉर्क में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बैठक से पहले, शेख मोहम्मद ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की. कतर मिशन के डिप्टी चीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात की पुष्टि की. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा, कतर की मध्यस्थ भूमिका और इजराइली हमलों के बाद रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत हुई.

कतर की मध्यस्थता और क्षेत्रीय शांति के प्रयास

कतर ने इजराइल-हमास के बीच जारी संघर्ष में युद्ध विराम, बंधकों की रिहाई और गाजा के पुनर्वास को लेकर अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. शेख मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि इजराइल शांति प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है, लेकिन कतर इस प्रयास में पीछे नहीं हटेगा. कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई. कतर ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई.अमेरिकी पक्ष ने कतर के शांति प्रयासों को सराहा और इसे मध्य पूर्व में अपने करीबी सहयोगी के रूप में स्वीकार किया. यह संकेत मिल रहा है कि दोनों देश इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री का इजराइल दौरा

वहीं, शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इजराइल पहुंच रहे हैं. उनका दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब फ्रांस के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा फिलिस्तीन को अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता देने पर चर्चा कर रही है. रुबियो का दौरा इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने हमास के कब्जे में फंसे अमेरिकी नागरिकों को वापस लाने का वादा किया है. वे बंधकों के परिवारों से भी मुलाकात करेंगे और इजराइली नेताओं से गाजा में जारी कार्रवाई तथा यूएन में फिलिस्तीन से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. फ्रांस के प्रस्ताव को फिलिस्तीन के दो-राज्य समाधान के पक्ष में माना जाता है, जिसे भारत और कतर सहित 142 देशों का समर्थन प्राप्त है.

गाजा में बढ़ती हिंसा और मानवीय संकट

हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला किया था, जिसमें 1,200 से ज्यादा इजराइली नागरिक मारे गए और 250 से अधिक लोग बंधक बनाए गए. फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजराइली हमलों में गाजा में अब तक 64,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. गाजा में इजराइली बमबारी के अलावा, लेबनान, सीरिया, ईरान और यमन में भी हवाई हमले किए गए हैं. इन हमलों की वजह से लगभग 19 लाख फिलिस्तीनी गाजा से पलायन कर चुके हैं.

कतर पर हमलों के पीछे क्या मकसद?

9 सितंबर को कतर पर हुए हमलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या इजराइल ने कतर पर हमला इसलिए किया है ताकि गाजा में बढ़ते मानवीय संकट से ध्यान हटाया जा सके? या इसका मकसद हमास को साफ संदेश देना है कि उसके छिपने की कोई जगह नहीं बची है और उसे जल्द समझौता करना चाहिए? अमेरिकी विदेश मंत्री के हालिया दौरे के बाद इस संदर्भ में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.

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