रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पहली बार भारत आएंगे पुतिन, S-400, S-500 और SU-57 की हो सकती है डील

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिसंबर 2025 में भारत दौरे पर आने की संभावना जताई जा रही है.

Putin will visit India for the first time since the Russia-Ukraine war began
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिसंबर 2025 में भारत दौरे पर आने की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, यह यात्रा 5 और 6 दिसंबर को हो सकती है. यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी. इससे पहले दिसंबर 2021 में, कोविड महामारी के दौरान पुतिन भारत आए थे, जब उन्होंने सीधे हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.

इस बार उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत-रूस के रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जाना है. मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में दोनों देशों के बीच रिश्तों को मज़बूत करना, रक्षा तकनीक, ऊर्जा, व्यापार और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.

SU-57 और S-500 को लेकर ऐलान संभव

इस संभावित भारत यात्रा के दौरान पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने वाली वार्ता में कई बड़ी रक्षा परियोजनाओं को लेकर बातचीत हो सकती है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण रूस का SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट भारत को देने का प्रस्ताव है. सूत्रों के अनुसार, रूस इस विमान की तकनीक का 70% ट्रांसफर भारत को देने को तैयार है, जिससे भविष्य में इसका संयुक्त उत्पादन भारत में ही किया जा सकेगा.

इसके अलावा भारत ने रूस से अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद की इच्छा जताई है. साथ ही, अगली पीढ़ी का S-500 एयर डिफेंस सिस्टम भारत में संयुक्त रूप से विकसित करने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन सकती है.

इन परियोजनाओं पर समझौते होने की स्थिति में, यह न केवल भारत की वायु रक्षा क्षमता को एक नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की चिंता भी बढ़ सकती है, खासतौर पर उन परिस्थितियों में जब अमेरिका पहले ही भारत को रूस से हथियार खरीदने को लेकर दबाव बनाता रहा है.

नौसेना के लिए आधुनिक हथियार पर भी चर्चा

सिर्फ वायुसेना ही नहीं, बल्कि भारत-रूस वार्ता में नौसेना के लिए भी एडवांस सिस्टम्स की सप्लाई और तकनीकी साझेदारी की बात हो सकती है. इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाले मिसाइल सिस्टम, अंडरवाटर वारफेयर टेक्नोलॉजी और अन्य नेवल इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं. भारत, अपने समुद्री सुरक्षा ढांचे को और अधिक मज़बूत करने के लिए रूस की सहायता से अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को अपनाने का इच्छुक है.

अमेरिकी टैरिफ नीति के बीच भारत-रूस व्यापार

इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू व्यापारिक सहयोग से जुड़ा होगा. खासतौर पर कृषि, उर्वरक (फर्टिलाइज़र), और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहन बातचीत की संभावना है. हाल के वर्षों में रूस से फर्टिलाइज़र की सप्लाई भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है. दोनों देशों के बीच संयुक्त कृषि उत्पादन की संभावनाओं को लेकर पहले से बातचीत चल रही है, जो इस शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप ले सकती है.

यह दौरा उस समय हो रहा है जब अमेरिका की व्यापार नीतियों में भारत के प्रति सख्ती देखी जा रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को एक हथियार के रूप में भारत के खिलाफ उपयोग करने की धमकी दी है. ऐसे में रूस भारतीय निर्यातकों के लिए वैकल्पिक बाजार उपलब्ध करा सकता है. रूसी बाजार में भारतीय वस्तुओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयास इस वार्ता के केंद्र में हो सकते हैं.

हाल के महीनों में गहराई है बढ़ती साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हाल के महीनों में संवाद में तेजी देखी गई है. अगस्त 2025 से अब तक दोनों नेताओं के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हो चुकी है. इसके अतिरिक्त, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में आमने-सामने बैठक भी हो चुकी है.

इन संवादों ने यह स्पष्ट किया है कि दोनों देश वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भी अपने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. चाहे बात ऊर्जा सुरक्षा की हो, रक्षा सौदों की, या व्यापार सहयोग की, भारत और रूस के हित लगातार एक-दूसरे से मेल खाते रहे हैं.

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