Dmitry Patrushev In India: दिल्ली में एक मुलाकात हुई, लेकिन इसके मायने सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं हैं. जब रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रुशेव भारत पहुंचे और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले, तो यह सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक भेंट नहीं थी, बल्कि ये संकेत था दो पुराने रणनीतिक सहयोगियों के बीच एक नई व्यापारिक ऊर्जा का.
भारत और रूस के बीच 2024 में व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यही नहीं, दोनों देशों ने आने वाले समय में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और रणनीतिक निवेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार किया है.
Happy to meet Russia's Deputy Prime Minister Dmitry Patrushev at the World Food India 2025. We discussed ways to strengthen our win-win cooperation in agriculture, fertilizers and food processing. pic.twitter.com/SWzYAUaYdw
— Narendra Modi (@narendramodi) September 25, 2025
क्या खास रहा इस मुलाकात में?
इस बैठक की टाइमिंग भी कम अहम नहीं है. यह मुलाकात ‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2025’ के आयोजन के दौरान हुई, एक ऐसा मंच जो वैश्विक खाद्य और कृषि उद्योग को भारत में जोड़ने का बड़ा अवसर बन चुका है. दिमित्री पत्रुशेव ने कहा, “भारत हमारा भरोसेमंद दोस्त है. रूस भारत के साथ हर सेक्टर में मिलकर काम करना चाहता है.” वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भी कृषि, खाद और फूड प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाने पर खास फोकस दिया.
क्या है भारत और EAEU के बीच FTA की अहमियत?
इस बैठक में एक बड़े रणनीतिक प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई, भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA). अगर यह समझौता हो जाता है, तो भारत को रूस और उसके सहयोगी देशों के साथ व्यापार करने में कम टैक्स और कम रुकावटों का फायदा मिलेगा. इससे व्यापारिक लागत घटेगी. साथ ही भारतीय कृषि और टेक्सटाइल उत्पादों को नए बाज़ार मिलेंगे. इसके अलावा रूस को भी एशियाई मार्केट में बेहतर पहुंच मिलेगी.
BRICS अनाज बाजार, एक नई पहल
इस बातचीत में BRICS देशों के लिए ‘Grain Exchange’ यानी एक साझा अनाज बाजार की योजना भी सामने आई. यह प्रस्ताव कृषि उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए रखा गया. भारत, रूस, ब्राजील जैसे देशों के पास भारी मात्रा में गेहूं, चावल और अन्य खाद्यान्न हैं, और एक साझा बाज़ार बनने से इनकी कीमतें और आपूर्ति ज्यादा स्थिर हो सकती हैं.
भू-राजनीतिक तनाव के बीच संतुलन की मिसाल
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी, तब भारत ने एक संतुलित कूटनीति अपनाई. अमेरिका की ओर से भारतीय तेल आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को न सिर्फ बनाए रखा बल्कि और मजबूत किया.
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