कुआलालंपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर शनिवार को मलेशिया पहुंचे. हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. स्वागत कार्यक्रम में मलेशिया की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली, जहां लोक नृत्य की प्रस्तुति दी गई. पीएम मोदी ने कलाकारों का अभिवादन किया और उनकी सराहना की.
कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत को दुनिया एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे कई देशों के साथ भारत की व्यापारिक साझेदारियां हैं. उनके मुताबिक, “आज भरोसा भारत की सबसे मजबूत करेंसी बन गया है.”
भारत-मलेशिया रिश्तों को नई दिशा
इस कार्यक्रम में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भी मौजूद थे. पीएम मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति मलेशिया की प्रगति से जुड़ी हुई है और यह पूरे एशिया के विकास का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि भारत और मलेशिया के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देश ‘इम्पैक्ट’ यानी भारत-मलेशिया साझेदारी के जरिए साझा बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना इस दौरे का मुख्य उद्देश्य है. यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की सोच का भी अहम हिस्सा है.
एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
कुआलालंपुर पहुंचने पर पीएम मोदी का स्वागत मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने किया. इस दौरान मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री रामनन रामकृष्णन और उप विदेश मंत्री लुकानिसमान बिन अवांग सौनी भी मौजूद रहे. स्वागत कार्यक्रम में दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया.
भारतीय समुदाय रिश्तों की मजबूत कड़ी
पीएम मोदी ने कहा कि मलेशिया में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी भारतीय मूल की आबादी रहती है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है. उन्होंने बताया कि हाल ही में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उन्होंने मलेशिया के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का जिक्र किया था, जहां सैकड़ों बच्चे भारतीय भाषाएं सीख रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय ने यहां सदियों से अपनी परंपराओं को संभाल कर रखा है, जो सराहनीय है.
तमिल विरासत पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मलेशिया में तमिल समुदाय लंबे समय से समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान दे रहा है. उन्होंने बताया कि मलाया यूनिवर्सिटी में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना पर भारत को गर्व है. अब दोनों देशों की साझा विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक तिरुवल्लुवर सेंटर बनाने की भी योजना है.
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