ग्लोबल कच्चे तेल मार्केट में मचेगी हलचल! बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमतें, क्या है भारत का प्लान?

दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उथल-पुथल को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने में जुट गया है.

Petrol and diesel prices may increase what is Indias plan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उथल-पुथल को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने में जुट गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति घटने और रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते तेल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में भारत अवसर का लाभ उठाकर अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves - SPR) को भरने और उनका विस्तार करने की योजना बना रहा है.

मई 2025 में कच्चे तेल की कीमतें चार साल के निचले स्तर यानी 60 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थीं. लेकिन जून में इनमें फिर तेजी आई और भाव 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए. वर्तमान में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही है.

विश्लेषकों का कहना है कि ये दरें अभी “अनुकूल” मानी जा रही हैं, लेकिन अगले कुछ महीनों में इनमें उछाल आ सकता है. अमेरिका द्वारा रूस की प्रमुख तेल कंपनियों- रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर 21 नवंबर से लागू होने वाले नए प्रतिबंधों के चलते वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा ओपेक प्लस (OPEC ) देशों ने जनवरी से मार्च 2026 तक उत्पादन बढ़ोतरी पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जिससे तेल की उपलब्धता सीमित रह सकती है.

भारत का रणनीतिक तेल भंडारण मिशन

भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) क्षमता बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) के पास फिलहाल लगभग 5.3 मिलियन टन भंडारण क्षमता है, लेकिन इसमें से केवल 3.6 मिलियन टन तेल ही भरा गया है.

वर्तमान में भारत के पास तीन प्रमुख भंडारण स्थल हैं —

  • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
  • पडुर (कर्नाटक)
  • मंगलुरु (कर्नाटक)

सरकार अब दो और नई साइटों पर अंडरग्राउंड कैवर्न (Underground Cavern) विकसित करने की योजना बना रही है, जिससे भंडारण क्षमता दोगुनी से अधिक हो जाएगी. इन परियोजनाओं से भारत के पास आकस्मिक स्थितियों में कई सप्ताह तक आयात पर निर्भर हुए बिना पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने की क्षमता होगी.

क्यों जरूरी है तेल भंडार को बढ़ाना

पूर्व ISPRL एमडी और सीईओ एच.पी.एस. अहूजा के अनुसार, रणनीतिक भंडार का उपयोग किसी भी बड़े भूराजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के समय देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि जब कीमतें नीचे हों, तो ऐसे समय में भंडार भर लेना भविष्य के लिए एक मजबूत कदम होता है.

सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को निर्देश दिया गया है कि वे ISPRL की ओर से तेल की खरीद बढ़ाएं. इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी.

तेल की कीमतें क्यों बढ़ सकती हैं

रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि रूस पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों से आपूर्ति में गिरावट आएगी. पहले भारत समेत कई देशों को रूसी तेल रियायती दरों पर मिल रहा था, लेकिन प्रतिबंधों के बाद यह आपूर्ति प्रभावित होगी. 

उन्होंने कहा, "21 नवंबर के बाद जब रूस से तेल की आपूर्ति घटेगी, तब वैश्विक कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा. पहले से ही बाजार में हल्की बढ़त देखी जा रही है, आने वाले महीनों में यह तेज हो सकती है."

दूसरी ओर, OPEC देशों का उत्पादन सीमित रखने का निर्णय बाजार में और दबाव डाल सकता है. इस समूह ने दिसंबर तक प्रतिदिन 1,37,000 बैरल उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन जनवरी 2026 से यह वृद्धि रोक दी जाएगी. समूह के आठ सदस्य देशों ने मौसम और बाजार परिस्थितियों के कारण उत्पादन रोकने का संकेत दिया है.

भारत की ऊर्जा रणनीति

भारत अपनी ऊर्जा नीति में 'किफायती और सतत आपूर्ति' पर जोर दे रहा है. सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में देश की तेल निर्भरता घटाई जाए और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, सौर और बायोफ्यूल के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए.

फिर भी, वर्तमान में भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% आयात से पूरा करता है. ऐसे में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है.

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "हम कीमतें कम रहते समय तेल भंडार भरकर भविष्य की अस्थिरता से बचाव करना चाहते हैं. आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण तेल महंगा होने की संभावना है."

क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी?

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में वृद्धि की संभावना है. वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का औसत भाव 75 डॉलर से ऊपर चला जाता है, तो घरेलू बाजार में इसका असर दिख सकता है.

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